पृथ्वी दिवस: दलाईलामा बोले- जलवायु परिवर्तन से तिब्बत और धर्मशाला में घटती देखी है बर्फबारी
बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने अपने संदेश में तिब्बत जैसे स्थानों के मरुस्थल में बदलने के खतरे के प्रति आगाह किया। दुनिया को अपने एकमात्र घर पृथ्वी और इसकी प्रकृति की रक्षा करने के लिए मिलकर प्रयास करने का भी संदेश दिया।
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विश्व पृथ्वी दिवस पर बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने अपने संदेश में कहा कि हमें जीवाश्म ईंधन की जगह पवन और सौर ऊर्जा को अपनाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे। उन्होंने लिखा कि वह खुद जलवायु परिवर्तन के कारण तिब्बत और धर्मशाला में बर्फबारी को घटते हुए देख चुके हैं। उन्होंने अपने संदेश में तिब्बत जैसे स्थानों के मरुस्थल में बदलने के खतरे के प्रति आगाह किया। दुनिया को अपने एकमात्र घर पृथ्वी और इसकी प्रकृति की रक्षा करने के लिए मिलकर प्रयास करने का भी संदेश दिया। दलाई लामा ने कहा कि हमें याद रखना चाहिए कि हर कोई एक खुशनुमा जीवन जीना चाहता है। केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि जानवरों, पक्षियों और कीड़ों में भी यही स्वाभाविक आकांक्षा रहती है। ऐसे में हम सभी को अपने साझा अस्तित्व के बारे में चिंतित होने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया काफी हद तक एक-दूसरे पर निर्भर है।
हर इनसान को प्रभावित करने वाले जलवायु परिवर्तन जैसे नए संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हमारी भागीदारी के कारण हमें समूची मानवता को ध्यान में रखना होगा। हमें वैश्विक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। हमें नवीकरणीय ऊर्जा के उन संसाधनों को अपनाना होगा जो पवन ऊर्जा या सौर ऊर्जा पर निर्भर हैं। पर्यावरण की रक्षा के लिए हमें पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल करनी होगी। बौद्ध धर्मगुरु ने बताया कि कई वैज्ञानिकों ने मुझे बताया है कि तिब्बत जैसे स्थानों के मरुस्थल में बदलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसलिए मैं तिब्बत के नाजुक पर्यावरण की रक्षा के मुद्दे पर लगातार बोलने के लिए प्रतिबद्ध हूं। हमारा जीवन इसी उम्मीद पर आधारित है कि चीजें बेहतर होंगी। यह उम्मीद हमारे भविष्य से जुड़ी हुई है। ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कई युवा एक साथ मिलकर इसके उपाय खोजने और साझा करने में जुटे हैं। वही हमारी उजली उम्मीद हैं। जलवायु परिवर्तन का खतरा किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह हम सभी को प्रभावित करता है।
बौद्ध धर्मगुरु जुलाई-अगस्त में करेंगे लद्दाख का दौरा
बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा जुलाई या अगस्त में लद्दाख बौद्ध संघ के अनुरोध पर लद्दाख का दौरा करेंगे। लद्दाख के थिकसे मठ के रिनपोछे ने उनसे मठ में आकर प्रवचन देने का अनुरोध किया था। इससे पहले दलाई लामा ने मार्च 2020 में कोविड महामारी की शुरुआत के बाद से मैक्लोडगंज स्थित आवास पर ही अपना समय बिताया। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक सभाओं और लोगों से मिलने पर रोक लगा रखी थी। इस साल कोरोना से हालात सामान्य होने के बाद ही उन्होंने मेलजोल शुरू किया है।
सोनम वांगचुक ने दलाईलामा को भेंट किया बर्फ का टुकड़ा
जलवायु परिर्वतन को लेकर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुक्रवार को मैक्लोडगंज में शुरू हो गया। सम्मेलन तिब्बत पॉलिसी इंस्टीट्यूट, यूरेक रिसर्च संस्था, चेक्स स्पोर्ट तिब्बत और इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के संयुक्त प्रयासों से करवाया जा रहा है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पर्यावरण कार्यकर्ता और वैज्ञानिक इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं। इन्होंने शुक्रवार सुबह धर्म गुरु दलाईलामा के आवास पर मुलाकात की। इस दौरान जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चिंताओं को साझा करने के लिए सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे चर्चित फिल्म थ्री इडियट्स के असल किरदार सोनम वांगचुक ने भी दलाईलामा से मुलाकात की। उन्होंने दलाईलामा को खार्दुंगला के ग्लेशियर से लाया बर्फ का टुकड़ा भी भेंट किया। बर्फ का यह टुकड़ा भेंट कर उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में लगातार पिघल रहे ग्लेशियरों की ओर दलाईलामा का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान उन्होंने दलाईलामा से आग्रह किया कि वे लोगों को सादा जीवन जीने के लिए प्रेरित करें।