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सूखे की मार : एक माह देरी से शुरू होगा नाशपाती का सीजन
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बारिश न होने से 70 फीसदी फसल ख्रराब
फल का आकार और गुणवत्ता हो चुकी है प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सूखे के चलते जिला शिमला में इस बार नाशपाती का सीजन एक माह देरी से शुरू होगा। बागवानों के अनुसार भीषण गर्मी के चलते जहां सीजन देरी से शुरू होगा, वहीं इसकी गुणवत्ता पर भी इसका असर होगा।
बारिश न होने से पौधे सूख रहे हैं। इसका सीधा असर पौधे की गुणवत्ता और आकार पर पड़ रहा है। पौधे सूखने से फलों के झड़ने की समस्या बढ़ गई है। ज्यादातर निचले इलाकों में यह समस्या देखने को मिल रही है। बागवानों का कहना है कि इस साल बीते वर्ष के मुकाबले नाशपातियों की पैदावार अधिक थी। अच्छी फसल के साथ अच्छे दाम मिलने की भी उम्मीद थी लेकिन 20 दिन से बारिश न होने के कारण सूखे की स्थिति बन गई है। इस वजह से सेब और नाशपाती की करीब 50 से 70 फीसदी फसल खराब हो गई है। ऐसे में खाद और पौधे के रख रखाव का खर्चा निकालना मुश्किल हो जाएगा।
गुम्मा पंचायत के प्रधान एवं बागवान राजेंद्र चौहान ने बताया कि इस बार सीजन शुरू होने में देरी हो गई है। सूखे की वजह से फल तैयार होने में समय ले रहा है। मौजूदा समय में फल की स्थिति भी खराब हो गई है। बारिश होने के बाद फल फटने का खतरा भी बढ़ गया है। राजेंद्र चौहान ने बताया कि जो हालात बने हुए हैं उसके हिसाब से तो इस वर्ष 10 से 15 जुलाई तक सीजन शुरू होने की उम्मीद है। भट्ठाकुफर फल मंडी के कुशान ट्रेडर्स केटी 46 नंबर फर्म के संचालक यशवंत शर्मा ने बताया कि बीते साल जून के पहले हफ्ते में मंडी में नाशपाती की फसल पहुंचना शुरू हो गई थी।
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नहीं बढ़ रहा फल का आकार : चौहान
भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान प्रताप चौहान ने बताया कि बारिश न होने से पौधों के पत्ते पीले पड़ गए हैं। इस वजह से फल का आकार नहीं बढ़ रहा है। पते पीले पड़ने के बाद फल न हरा रहता और न ही पकता है। इस बार यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। इसके चलते इस बार सीजन देरी से शुरू होगा।
-प्रताप चौहान, प्रधान भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन
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फल का आकार और गुणवत्ता हो चुकी है प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सूखे के चलते जिला शिमला में इस बार नाशपाती का सीजन एक माह देरी से शुरू होगा। बागवानों के अनुसार भीषण गर्मी के चलते जहां सीजन देरी से शुरू होगा, वहीं इसकी गुणवत्ता पर भी इसका असर होगा।
बारिश न होने से पौधे सूख रहे हैं। इसका सीधा असर पौधे की गुणवत्ता और आकार पर पड़ रहा है। पौधे सूखने से फलों के झड़ने की समस्या बढ़ गई है। ज्यादातर निचले इलाकों में यह समस्या देखने को मिल रही है। बागवानों का कहना है कि इस साल बीते वर्ष के मुकाबले नाशपातियों की पैदावार अधिक थी। अच्छी फसल के साथ अच्छे दाम मिलने की भी उम्मीद थी लेकिन 20 दिन से बारिश न होने के कारण सूखे की स्थिति बन गई है। इस वजह से सेब और नाशपाती की करीब 50 से 70 फीसदी फसल खराब हो गई है। ऐसे में खाद और पौधे के रख रखाव का खर्चा निकालना मुश्किल हो जाएगा।
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गुम्मा पंचायत के प्रधान एवं बागवान राजेंद्र चौहान ने बताया कि इस बार सीजन शुरू होने में देरी हो गई है। सूखे की वजह से फल तैयार होने में समय ले रहा है। मौजूदा समय में फल की स्थिति भी खराब हो गई है। बारिश होने के बाद फल फटने का खतरा भी बढ़ गया है। राजेंद्र चौहान ने बताया कि जो हालात बने हुए हैं उसके हिसाब से तो इस वर्ष 10 से 15 जुलाई तक सीजन शुरू होने की उम्मीद है। भट्ठाकुफर फल मंडी के कुशान ट्रेडर्स केटी 46 नंबर फर्म के संचालक यशवंत शर्मा ने बताया कि बीते साल जून के पहले हफ्ते में मंडी में नाशपाती की फसल पहुंचना शुरू हो गई थी।
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नहीं बढ़ रहा फल का आकार : चौहान
भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान प्रताप चौहान ने बताया कि बारिश न होने से पौधों के पत्ते पीले पड़ गए हैं। इस वजह से फल का आकार नहीं बढ़ रहा है। पते पीले पड़ने के बाद फल न हरा रहता और न ही पकता है। इस बार यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। इसके चलते इस बार सीजन देरी से शुरू होगा।
-प्रताप चौहान, प्रधान भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन