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पशुपालकों पर पड़ी सूखे की मार, पंजाब से 650 रुपये क्विंटल पहुंच रही है तूड़ी

Sun, 06 Jun 2021 09:05 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, ऊना/शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, ऊना/शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 06 Jun 2021 09:05 PM IST
सार

बीते साल बरसात में कम बारिश और रबी के सीजन में सूखे के कारण जिले किसानों को चारे की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके चलते किसानों के पंजाब और चंडीगढ़ से तूड़ी मंगवानी पड़ रही है।

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Drought hit cattleman, tudi cattle feed Rs 650 quintal is reaching himachal from Punjab
तूड़ी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुछ माह पहले हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में बारिश न होने से किसानों को अब चारे की समस्या से जूझना पड़ रहा है। सूखे के कारण गेहूं की पैदावार कम होने से पशुचारे (तूड़ी) की कमी महसूस की जा रही है। इससे तूड़ी के भाव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। पंजाब से टेंपो और गाड़ियों में लाया हरा चारा 650 रुपये प्रति क्विंटल पशुपालकों को मिल रहा है। सबसे बड़ी परेशानी पशुपालकों को यह आ रही है कि 650 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान करने के बाद भी व्यापारी साफ पशुचारा नहीं दे रहे हैं।

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क्विंटल के हिसाब से पूरा पशुचारा भी नहीं दिया जा रहा। गौरतलब है कि इस वर्ष कई किसानों को गेहूं की फसल में 70 से 80 फीसदी का नुकसान हुआ है। ज्यादातर किसानों को 50 फीसदी तक गेहूं की फसल में नुकसान हुआ था। बंगाणा उपमंडल में 33 से 50 प्रतिशत तक गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी। इसके चलते पशुपालकों को अब तूड़ी की कमी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिन किसानों ने अभी तक तूड़ी नहीं खरीदी है, उन्हें आगामी दिनों में और अधिक कीमत पर तूड़ी खरीदनी पड़ेगी। कृषि उपनिदेशक डॉ. जेएस सेन ने कहा कि पशुपालकों की समस्या को लेकर सरकार को लिखा जाएगा। 
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शिमला में 11 रुपये किलो मिल रही तूड़ी 
 बीते साल बरसात में कम बारिश और रबी के सीजन में सूखे के कारण शिमला जिले किसानों को चारे की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके चलते किसानों के पंजाब और चंडीगढ़ से तूड़ी मंगवानी पड़ रही है। पशुपालकों को एक किलो तूड़ी के लिए 11 रुपये तक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि जिले में चारे की ज्यादातर आपूर्ति घासनियों में उगने वाले घास से पूरी होती है। बीते साल बरसात में बारिश कम होने के कारण घास का उत्पादन बेहद कम हुआ है। इसके अलावा रबी के सीजन में बारिश नाममात्र होने के कारण गेहूं की पैदावार भी कम हुई है। पशु चारे की उपलब्धता कम होने के कारण किसानों को पंजाब और चंडीगढ़ से तूड़ी मंगवानी पड़ रही है। बीते कुछ दिनों में पंजाब में तूड़ी के दाम साढ़े छह रुपये तक पहुंच गए हैं। वहां से शिमला जिले तक किराये समेत तूड़ी के लिए किसानों को 11 रुपये किलो तक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। इससे किसानों को चारे के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ रहे हैं।

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