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Drone In Farming: नगरोटा बगवां में खेतों में खाद डालने को हुआ ड्रोन का इस्तेमाल, लग रहे इतने रुपये
Fri, 19 Jul 2024 04:30 PM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, नगरोटा बगवां (कांगड़ा)।
संवाद न्यूज एजेंसी, नगरोटा बगवां (कांगड़ा)।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Fri, 19 Jul 2024 04:30 PM IST
सार
ड्रोन ने कृषि के क्षेत्र में भी क्रांति लाकर रख दी है. अब किसान भाई ड्रोन की मदद से फसल पर खाद और कीटनाशकों का छिड़काव कर सकते हैं. नगरोटा बगवां की घोड़व पंचायत में ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक का छिड़काव किया गया। ड्रोन के माध्यम से 10 कनाल भूमि पर खाद का छिड़काव करने के लिए कितने पैसे लग रहे हैं... खबर में जानें...
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नगरोटा बगवां की घोड़व पंचायत में ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक का छिड़काव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
इफ्को द्वारा नगरोटा बगवां एवं अन्य क्षेत्रों के लिए कृषि ड्रोन तकनीक के माध्यम से फसलों पर नैनो उर्वरकों के स्प्रे के लिए सेवा शुरू कर दी है। इसके चलते नगरोटा बगवां की घोड़व पंचायत में ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक का छिड़काव किया गया। ड्रोन के माध्यम से 10 कनाल भूमि पर खाद का छिड़काव करने के लिए 300 रुपये वसूले जा रहे हैं।
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इफ्को के क्षेत्रीय अधिकारी श्रेय सूद और एसएसए कांगड़ा परविंदर सिंह ने बताया कि किसान अपने स्मार्ट फोन पर इफको किसान उदय ऐप डाउनलोड करके अपना विवरण डाल कर अपने खेतों पर नैनो उर्वरकों का स्प्रे करवाने के लिए ड्रोन की बुकिंग करवा सकते हैं। इफ्को द्वारा कछियारी निवासी ग्राम उद्यमी प्रज्वल शर्मा को कृषि ड्रोन प्रदान कर प्रशिक्षण के बाद ड्रोन चलाने के लिए सक्षम बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक यूरिया किसानों द्वारा आमतौर पर अपनी फसलों में डाला जाता है, जिसके काफी दुष्प्रभाव हमारी मृदा एवं पर्यावरण के लिए साबित हो रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया तरल प्लस इफको द्वारा बनाया एक नया उत्पाद है, जिसके अंदर 20 प्रतिशत नाइट्रोजन उपलब्ध है एवं इसे फसल के ऊपर स्प्रे के माध्यम से इस्तेमाल किया जाता है। पत्तों पर छिड़कने से नैनो यूरिया प्लस 80 से 90 प्रतिशत तक पौधे द्वारा सोख लिया जाता है। इसके कारण मृदा में जाने वाला बोरी वाला यूरिया आधा करके किसान मृदा एवं हमारे पानी के स्रोतों को दूषित होने से बचा सकते हैं एवं नैनो यूरिया प्लस की 500 मिलीलीटर की बोतल से किसान 10 कनाल भूमि को स्प्रे करके अपने पारंपरिक यूरिया की मात्रा को आधा कर फसल से बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं।
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