डॉक्टरों का खुलासा, इस कारण बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
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आयु बढ़ने के साथ साथ ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। अनुमान के मुताबिक हर छह सेकंड में एक व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक होने के तीन घंटों के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
आईजीएमसी में बीते एक वर्ष के आंकड़ों के अनुसार 240 मरीज दाखिल हुए। इन मरीजों में से सबसे ज्यादा 191 मरीजों के दिमाग की नसों में ब्लॉकेज थी। इनमें से करीब 33 मरीजों को तीन घंटे के भीतर उपचार दिया गया। जबकि बाकी के बचे लोग तीन घंटे की समय अवधि से लेट उपचार को पहुंचे थे। यह जानकारी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य वार्ता के दौरान गेयटी थियेटर में दी।
चिकित्सकों का कहना है कि स्ट्रोक के कारण व्यक्ति के मुंह हाथ और बाजू पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जिसे आम भाषा में अधरंग या पक्षाघात भी कहा जाता है। हिमाचल में औसतन इस रोग के पंद्रह से बीस हजार के करीब मरीज हैं। जबकि प्रत्येक वर्ष पांच से दस हजार नए लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक स्ट्रोक होने पर व्यक्ति के दिमाग में खून का बहाव रुक जाता है, जिससे कि ऑक्सीजन नही पहुंच पाती।
तीन घंटों के भीतर पहुंचे अस्पताल
जिन लोगों को ब्रेन स्ट्रोक होता है। उन मरीजों को तीन घंटे के भीतर तुरंत अस्पताल लाना चाहिए। जिससे कि उन्हें सही समय पर इलाज मिल सके।- डॉ. सुधीर शर्मा, - विभागाध्यक्ष न्यूरोलोजी विभाग, आईजीएमसी
40 से कम आयु के 20 प्रतिशत लोग गिरफ्त में
ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में 40 वर्ष की आयु से कम के 20 प्रतिशत लोग चपेट में हैं। जबकि चिकित्सकों का कहना है कि 50 फीसदी मरीज स्ट्रोक होने के छह महीनों भीतर मरते हैं। 25 फीसदी कुछ समय बाद ठीक हो जाते हैं।
ऐसे करें बचाव
डाक्टरों का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक को कम करने के लिए तथा उससे बचने के लिए व्यक्ति को धूम्रपान छोड़ना चाहिए। जबकि बीपी को कंट्रोल करने से 40 प्रतिशत दर कम किया जा सकता है। वहीं शुगर का उचित इलाज मिलने से बचा जा सकता है। जिन लोगों का वजन ज्यादा है। उन्हें अपने वजन को कंट्रोल करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना आधे घंटे सैर करनी चाहिए।
यह होता ब्रेन स्ट्रोक के दौरान
व्यक्ति के मुंह टेढ़ा होना, बाजू का काम न करना, ठीक से देख न पाना। इसके अलावा इसकी जानकारी न होना स्ट्रोक का मुख्य कारण है।