दीवाली पर एहतियात बरतेंगे तो महफूज रहेंगे
दिवाली पर पटाखे जरा संभलकर फोड़ें। जरा सी असावधानी भारी पड़ सकती है और आप अस्पताल पहुंच सकते हैं। हर साल दिवाली पर बड़ी संख्या में बर्न के मामले सामने आते हैं। रंग- बिरंगी रोशनी वाला पटाखा अनार देखने में भले ही अच्छा लगता हो, लेकिन दिवाली पर सबसे ज्यादा जख्म यही देता है। डॉक्टरों के मुताबिक हर साल दिवाली में आने वाले बर्न के मामले में नब्बे फीसदी लोग अनार से ही जले होते हैं।
दमा के मरीज घर से बाहर न निकलें। पटाखों से निकलने वाला धुआं इनके लिए घातक हो सकता है। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश का कहना है कि अनार को लोग हल्के में लेते हैं लेकिन पटाखों में यह सबसे अधिक खतरनाक है। अनार को जलने में 15 से 30 सेकेंड का समय लगता है, और यही इसे खतरनाक भी बनाता है।
लोग उसे बुझा हुआ समझकर उसे फिर से जलाने के लिए नीचे की ओर झुकते हैं। अधिकांश मामलों में यह अचानक जल उठता है, जिससे सामने वाले का चेहरा जल जाता है। अकसर लोग अनार को हाथ में लेकर जलाते हैं कई बार इसका पीछे का पार्ट जल जाता है, जिससे हाथ में बर्न हो जाता है।
क्या नुकसान करते हैं पटाखे
धुएं और प्रदूषण से अस्थमा की संभावना बढ़ जाती है। फेफड़े में दिक्कत हो सकती है।
पटाखों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ जाता है, जिससे लोगों के सुनने की शक्ति पर असर होता है।
आंखों में जलन, त्वचा में संक्रमण, चिंगारी छिटकने से आंख की कॉर्निया पर बुरा असर।
ये बरतें सावधानियां
जहां तक मुमकिन हो पटाखे जलाने से बचें।
पटाखे जलाते वक्त बच्चों के साथ ही रहें।
दुर्घटना से बचने के लिए साथ में पानी की बाल्टी रखें।
टिन या कांच की बोतल में रखकर पटाखा न जलाएं।
ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए कान में रूई डाल लें।
जलने पर क्या करें
स्किन के जले हुए हिस्से पर बरनॉल नीली स्याही या फिर दवा न लगाएं।
झुलसे हिस्से को बहते पानी में तब तक रखें जब तक जलन खत्म न हो जाए
आंखों में जलन होने पर ठंडे पानी के छींटे मारें और जल्दी डॉक्टर को दिखाएं।