Shimla: सचिवालय के पास दिव्यांगजनों ने किया चक्का जाम, पुलिस के साथ धक्कामुक्की; SDM ओशीन ने किया मामला शांत
सोमवार सुबह दृष्टिबाधित संगठन ने सचिवालय के बाहर चक्का जाम और प्रदर्शन किया। इस दाैरान वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।
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राजधानी शिमला में बुधवार सुबह दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया। छोटा शिमला स्थित कार्ट रोड पर सुबह करीब दस बजे प्रदर्शनकारी सड़क के बीचोंबीच बैठ गए, जिससे शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाले कार्ट रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। हालात ऐसे बने कि चार किलोमीटर से अधिक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को पैदल सफर करना पड़ा।
दृष्टिबाधित संघ के बैनर तले जुटे बेरोजगारों ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार केवल आश्वासन देती आ रही है, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही। सड़क जाम के कारण निजी वाहनों के साथ-साथ एचआरटीसी की बसें भी घंटों फंसी रहीं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ धक्कामुक्की भी हुई।
एसडीएम शिमला ओशीन शर्मा ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत किया। गौरतलब है कि दृष्टिबाधित बेरोजगार पिछले दो वर्षों से शिमला में धरने पर बैठे हैं। इस दौरान वे कई बार नौकरी की मांग को लेकर चक्का जाम कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर विगत 3 दिसंबर को भी एसडीएम शिमला और पुलिस अधिकारियों के साथ इनका टकराव हुआ था। उस दिन भी सड़कों पर बैठकर चक्का जाम किया गया था। सोमवार को एक बार फिर बेरोजगार सड़कों पर उतर आए, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
दृष्टिबाधित बेरोजगारों की प्रमुख मांग विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिहीन कोटे के खाली पड़े बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरना है। इसके साथ ही पेंशन राशि बढ़ाने और मूलभूत सुविधाओं में सुधार की भी मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये पद वर्षों से खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार जानबूझकर भर्तियां नहीं कर रही। दृष्टिबाधित संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी चक्का जाम किया जाता है, तब प्रशासन बातचीत के लिए बुला लेता है, लेकिन बाद में मांगों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।