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भाजपा को उम्मीद, नये वार्ड बनने से मिलेगी मजबूती, विरोधियों के पर भी कतरे

Thu, 10 Feb 2022 11:03 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 11:03 PM IST
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dispute strat on New ward
संजौली, कृष्णानगर और खलीनी है भाजपा का गढ़
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अब तीन की बजाय छह पार्षद मिलने की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम चुनाव से ठीक पहले नए वार्डों के गठन से अब राजधानी की सियासत और गरमा गई है। पंचायती इलाके मर्ज किए बिना ही शहर में सात नए वार्डों के गठन के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
शहर में खलीनी, कृष्णानगर, विकासनगर जैसे बड़े वार्डों का टूटना तय था लेकिन कसुम्पटी, रुल्दूभट्ठा, छोटा शिमला और संजौली जैसे वार्ड भी दो हिस्सों में बांटकर एक तीर से दो निशाने लगाने की कोशिश की है। इससे न सिर्फ भाजपा को मजबूती मिलेगी बल्कि पार्टी के भीतर के विरोधियों के पर कतरने का भी प्रयास किया है। भाजपा विधायक एवं शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज के शिमला शहरी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले चार वार्डों को तोड़ा गया है। अभी शहरी क्षेत्र में 18 वार्ड थे लेकिन अब इनकी संख्या 22 हो गई है। कृष्णानगर और संजौली वार्ड भाजपा का गढ़ रहा है। इन्हें दो भागों में बांटना भाजपा को फायदा दे सकता है। खलीनी वार्ड में भी बीते चुनाव में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है। ऐसे में शिमला शहर विधानसभा क्षेत्र के इस वार्ड से भी भाजपा को इस बार दो पार्षद मिलने की उम्मीद है।
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अब चुनाव पर नजरें
शहर के रुल्दूभट्ठा वार्ड में भाजपा का दबदबा रहा है लेकिन स्थानीय पार्षद का स्थानीय विधायक से टकराव किसी से छिपा नहीं है। इस वार्ड के दो हिस्से करना भी इसी टकराव से जोड़कर देखा जा रहा है। लोअर बाजार और रामबाजार की सीमाएं दोबारा तय की गई हैं। इससे अब तक बिखरे पड़े यह वार्ड कुछ हद तक समेट दिए हैं। दोनों पर कांग्रेस का कब्जा है। ऐसे में नई सीमाएं भाजपा के लिए समीकरण बदल सकती है। विकासनगर और कसुम्पटी वार्ड भी तोड़े गए हैं। इनमें भी भाजपा के लिए आगामी निगम चुनाव में राहत मिल सकती है।
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अभी यह है समीकरण
नगर निगम में अभी कुल 34 में से 21 पार्षद भाजपा के हैं। 11 कांग्रेस पार्षद है। एक माकपा और एक निर्दलीय पार्षद भी है। साल 2017 में ही शहर में नए वार्डों का पुनर्गठन किया गया था। 2017 तक शहर में 25 वार्ड थे, बाद में इनकी संख्या 34 की गई।

वार्ड बढ़ाने के रहे हैं साइड इफेक्ट
इस साल मई-जून में नगर निगम चुनाव होने हैं। ऐसे में नए वार्ड बनने से किस पार्टी को फायदा होगा, इस पर सबकी नजरें रहेंगी। प्रदेश में बने नगर निगमों में नए इलाके शामिल करने और वार्ड बढ़ाने के साइड इफेक्ट सत्ताधारी पार्टी को झेलने पड़े हैं। 2017 में कांग्रेस ने निगम के वार्ड बढ़ाए थे लेकिन चुनाव में पार्टी बहुमत तक नहीं पहुंच पाई।
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