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एचपीयू के ईआरपी सिस्टम में खामियों को लेकर बवाल
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एसएफआई ने किया डीएस का घेराव, ऑनलाइन सिस्टम दुरुस्त करने की मांग
क्रॉसर
रिजल्ट घोषित होने से पहले डाउनलोड हो गई थी मार्क्सशीट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ऑनलाइन ईआरपी सिस्टम की खामी के चलते रिजल्ट घोषित होने से पहले मॉर्क्सशीट डाउनलोड पर बवाल खड़ा हो गया है। छात्र संगठनों ने विवि प्रशासन को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है।
एसएफआई की विवि इकाई ने शुक्रवार को इस मामले को लेकर डीएस प्रो. अरविंद कालिया को उनके कार्यालय में घेरा और उनसे जवाब मांगा। एसएफआई के इकाई अध्यक्ष विवेक राज और सचिव रॉकी की अगुवाई में डीएस कार्यालय पहुंचे कार्यकर्ताओं ने विवि के ईआरपी और रिजल्ट की गोपनीयता पर लगी इस मामले को लेकर उनसे जवाब मांगा। उन्होंने प्रशासन को तमाम खामियों को दूर करने, इस चूक के लिए जिम्मेदार कंपनी और विवि के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि सुधार न होने और ईआरपी सिस्टम में पेश रही खामियों को दूर नहीं किया तो तीन अक्तूबर से एसएफआई विवि में अधिकारियों का घेराव शुरू कर देगी। यूजी फाइनल का रिजल्ट घोषित होने से पहले ही डाउनलोड हो जाना ईआरपी सिस्टम की खामी को दर्शाता है। इससे परीक्षा की गोपनीयता भी समाप्त हो गई है। ईआरपी सिस्टम पर करोड़ों रुपये खर्च की गई है। इसकी जांच होनी चाहिए कि इतनी राशि खर्च होने के बावजूद सिस्टम दुरुस्त क्यों नहीं हुआ।
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त्रुटियां दूर करने के विवि वसूलता हैै छह सौ रुपये
विवि प्रशासन छह साल से इस सिस्टम की खामियों का पता लगाने और इसमें सुधार करने में नाकाम रहा है। विवि परीक्षा परिणाम की त्रुटियां दूर करने के लिए छह सौ रुपये फीस वसूलता है। हकीकत में यह त्रुटियां विवि के सिस्टम में खामियों के कारण आ रही हैं। चंबा, भरमौर, किन्नौर से रिजल्ट ठीक करवाने आने वाले छात्र को एक-एक गलती को दूर करवाने में किराया, ठहरने और फीस के नाम पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं जबकि इसके लिए जिम्मेदार विवि प्रशासन है।
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रिजल्ट घोषित होने से पहले डाउनलोड हो गई थी मार्क्सशीट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ऑनलाइन ईआरपी सिस्टम की खामी के चलते रिजल्ट घोषित होने से पहले मॉर्क्सशीट डाउनलोड पर बवाल खड़ा हो गया है। छात्र संगठनों ने विवि प्रशासन को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है।
एसएफआई की विवि इकाई ने शुक्रवार को इस मामले को लेकर डीएस प्रो. अरविंद कालिया को उनके कार्यालय में घेरा और उनसे जवाब मांगा। एसएफआई के इकाई अध्यक्ष विवेक राज और सचिव रॉकी की अगुवाई में डीएस कार्यालय पहुंचे कार्यकर्ताओं ने विवि के ईआरपी और रिजल्ट की गोपनीयता पर लगी इस मामले को लेकर उनसे जवाब मांगा। उन्होंने प्रशासन को तमाम खामियों को दूर करने, इस चूक के लिए जिम्मेदार कंपनी और विवि के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई।
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उन्होंने कहा कि सुधार न होने और ईआरपी सिस्टम में पेश रही खामियों को दूर नहीं किया तो तीन अक्तूबर से एसएफआई विवि में अधिकारियों का घेराव शुरू कर देगी। यूजी फाइनल का रिजल्ट घोषित होने से पहले ही डाउनलोड हो जाना ईआरपी सिस्टम की खामी को दर्शाता है। इससे परीक्षा की गोपनीयता भी समाप्त हो गई है। ईआरपी सिस्टम पर करोड़ों रुपये खर्च की गई है। इसकी जांच होनी चाहिए कि इतनी राशि खर्च होने के बावजूद सिस्टम दुरुस्त क्यों नहीं हुआ।
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त्रुटियां दूर करने के विवि वसूलता हैै छह सौ रुपये
विवि प्रशासन छह साल से इस सिस्टम की खामियों का पता लगाने और इसमें सुधार करने में नाकाम रहा है। विवि परीक्षा परिणाम की त्रुटियां दूर करने के लिए छह सौ रुपये फीस वसूलता है। हकीकत में यह त्रुटियां विवि के सिस्टम में खामियों के कारण आ रही हैं। चंबा, भरमौर, किन्नौर से रिजल्ट ठीक करवाने आने वाले छात्र को एक-एक गलती को दूर करवाने में किराया, ठहरने और फीस के नाम पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं जबकि इसके लिए जिम्मेदार विवि प्रशासन है।