एचआरटीसी कंडक्टर भर्ती मामले में गड़बड़ी का खुलासा, मंत्री को भेजी फाइल
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विवादों में आई कंडक्टर भर्ती की नए सिरे से हुई जांच में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। अभ्यर्थियों की कई उत्तर पुस्तिकाओं में डीएम और आरएम के हस्ताक्षर नहीं हैं। मंडी और कांगड़ा जिले में यह खामियां पाई गई हैं।
निगम अधिकारियों ने लिखित परीक्षा रद्द करने की फाइल परिवहन मंत्री को भेज दी है। अब इस पर मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय होगा। सूत्र बताते हैं कि लिखित परीक्षा खत्म होने के बाद अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं पर डीएम और आरएम के हस्ताक्षर होते हैं।
जांच में कई पुस्तिकाएं ऐसी पाई गई हैं जिसमें अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे। ऐसे में लग रहा है कि कहीं न कहीं चहेतों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। गौरतलब है कि पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान परिवहन निगम में 1300 कंडक्टर (टीएमपीए) की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे।
जरूरत से ज्यादा खरीदी बसों से 300 करोड़ घाटा
इसमें 40 हजार के करीब युवाओं ने आवेदन किया था। पूर्व सरकार ने लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया था लेकिन इस बीच आचार संहिता लगाने से फाइनल रिजल्ट नहीं निकल पाया। सत्ता में आते ही भाजपा सरकार इस भर्ती प्रक्रिया की जांच करवा रही है।
बिना डिमांड के चला दी वैट लीजिंग बसें
पूर्व कांग्रेस सरकार ने बिना डिमांड के ही वैट लीजिंग बसें चला दीं। भाजपा सरकार की ओर से की गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। पूर्व सरकार ने जाते-जाते कई ऐसी बसों को एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी कर दिया जो बाहरी राज्यों की थीं। चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए यह सब किया गया।
पूर्व कांग्रेस सरकार ने जरूरत से ज्यादा बसें खरीदी हैं जिससे परिवहन निगम को घाटा हुआ है। इन बसों की खरीदारी से परिवहन निगम को 300 करोड़ का घाटा हुआ है।