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धर्मशाला: श्रीलंका से मैक्लोडगंज पहुंचीं महात्मा बुद्ध की स्मृतियां, तिब्बती समुदाय ने किया जोरदार स्वागत

Thu, 04 Apr 2024 06:06 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मैक्लोडगंज/धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, मैक्लोडगंज/धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 04 Apr 2024 06:06 PM IST
सार

 श्रीलंका से लाई स्मृतियों के चुगलाखंग बौद्ध मठ पहुंचने पर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा भी मौजूद रहे। धर्मगुरु ने स्मृतियों को स्पर्श किया। इसके बाद स्मृतियों को दलाई लामा आवास पर ले जाया गया।

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Dharamshala: Memories of Mahatma Buddha brought to McLeodganj, people of Tibetan community gave warm welcome
महात्मा बुद्ध की स्मृतियां पहुंचीं मैक्लोडगंज - फोटो : संवाद

विस्तार

बौद्ध नगरी मैक्लोडगंज में गुरुवार को महात्मा बुद्ध की स्मृतियां पहुंची। श्रीलंका से लाई स्मृतियों के चुगलाखंग बौद्ध मठ पहुंचने पर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा भी मौजूद रहे। धर्मगुरु ने स्मृतियों को स्पर्श किया। इसके बाद स्मृतियों को दलाई लामा आवास पर ले जाया गया। स्मृतियों को लेकर कांगड़ा एयरपोर्ट से आए वाहन पर जगह-जगह जुटे तिब्बतियों और बौद्ध भिक्षुओं ने स्कार्फ (खता) डाल कर आस्था जताई। बता दें कि श्रीलंका में महात्मा बुद्ध की 21 स्मृतियां सहेज कर रखी गई थीं। इसमें से एक मंगोल के राजा को भेंट की जा चुकी है और अब दूसरी स्मृति तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को भेंट की गई। अब श्रीलंका में 19 स्मृतियां बची हैं। दलाई लामा ने कहा कि उन्हें बहुत खुशी है कि उन्हें महात्मा बुद्ध की स्मृतियां स्पर्श करने का अवसर प्राप्त हुआ।

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2017 में किया था संपर्क : लिंग रिंपोछे
7वें क्याब्जे योंगजिन लिंग रिनपोछे ने कहा कि श्रीलंका में श्रीलंका-तिब्बती बौद्ध ब्रदरहुड के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. डेमेंडा पोरगे ने 2017 में दलाई लामा को कपिलवस्तु अवशेष भेंट करने के लिए उनसे संपर्क किया। छह साल की योजना और तैयारी के बाद अब अनुरोध पूरा हुआ है। श्रीलंका में दो प्रमुख बौद्ध मठ हैं। दलाई लामा 60 वर्षों से मानवता और बुद्धत्व के लिए काम कर रहे हैं। इसके चलते श्रीलंका के बौद्ध भिक्षुओं ने धर्मगुरु दलाई लामा को यह अमूल्य अवशेष सौंपे हैं।
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धर्मगुरु दर्शनों की खुशी को बयां नहीं कर सकती : नावा
नेपाल से आई तिब्बती युवती नावा ने कहा कि इस बार मैक्लोडगंज आने पर उन्हें धर्मगुरु दलाई लामा का आशीर्वाद मिला और आज महात्मा बुद्ध के अवशेष देखने का मौका मिला। धर्मगुरु के दर्शन और उनकी शिक्षाओं को सुनने यहां आते रहते हैं। धर्मगुरु के दर्शन करके इतनी खुशी हो रही है कि उसे बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।
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