राजनीति की भेंट चढ़ा ‘शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट’
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हिल्स क्वीन शिमला को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना अधूरा रह गया। ‘शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट’ राजनीति की भेंट चढ़ गया। वीरवार को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार की ओर से अंतिम सूची जारी होने के बाद शिमला के प्रोजेक्ट में शामिल होने की आखिरी उम्मीद भी टूट गई। प्रदेश की राजधानी और विश्व मानचित्र पर ऐतिहासिक महत्व की जगह ‘शिमला’ आखिर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से कैसे बाहर हो गई? यह सवाल शिमला के हर नागरिक के जहन में कौंध रहा है।
शिमला की जगह धर्मशाला का स्मार्ट सिटी के लिए चयन होने पर सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम के पदाधिकारियों ने सरकार द्वारा शिमला के स्थान पर धर्मशाला को प्रोजेक्ट के लिए नामित करने को शिमला के लोगों के साथ धोखा करार दिया है। भाजपा भी चयन पर सवाल उठा रही है और सरकार के फैसले को शिमला के लोगों के साथ अन्याय बता रही है।
नगर निगम के प्रतिनिधियों का दावा है कि स्मार्ट सिटी के चयन के लिए गलत आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। धर्मशाला को जेएनएनयूआरएम सिटी के दस अंक दिए गए हैं जबकि हिमाचल प्रदेश में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत सिर्फ शिमला शहर को चयनित किया है। नगर निगम शिमला एकमात्र ऐसा शहरी निकाय है जिसने ई-सर्विस के तहत ई-पोर्टल और ई-पेमेंट की सुविधा उपलब्ध करवाई है।
नगर निगम शिमला ने ही पहली बार 2007 से डबल अकाउंटिंग शुरू की है। धर्मशाला में ऐसी बहुत सी सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं हैं जिनके अंक दे दिए हैं। भाजपा प्रतिनिधियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के लिए शहर के चयन को लेकर निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई है। सरकार ने आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ कर शिमला के स्थान पर धर्मशाला का नाम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए भेजा है।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का दिया है नोटिस : विधायक
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए शहर के चयन में हुई धांधली के मुद्दे पर विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया है। इस मामले पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकयानायडू और सांसद वीरेंद्र कश्यप को पत्र भी लिखा है। कांग्रेस सरकार द्वारा की गई गड़बड़ी और नगर निगम प्रतिनिधियों की लापरवाही से शिमला के लोगों का हक छीना गया है। सुरेश भारद्वाज विधायक, शिमला
केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे मुद्दा- मेयर ने कहा कि आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ कर राजधानी शिमला को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से बाहर किया है। इस मसले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। शिमला के लोगों के हितों के साथ किया जा रहा अन्याय सहन नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट में देंगे फैसले को चुनौती- इस मुद्दे को हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से कमेटी गठित की थी। निगम महापौर और कमिश्नर कमेटी के सदस्य थे बावजूद इसके प्रोजेक्ट से संबंधित बैठकों में मेयर और कमिश्नर को नहीं बुलाया गया।
मंत्री के शहर की लगी लाटरी- आखिरकार हिमाचल में शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का होम टाउन धर्मशाला स्मार्ट सिटी बनेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने सूबे के सभी 56 शहरी निकायों से पूछा था कि उन्हें स्मार्ट सिटी क्यों बनाया जाए? आनन फानन में जवाब आए लेकिन शहरी विकास मंत्री का फोकस शुरू से धर्मशाला था।
जबकि रेस में शिमला शहर भी शामिल था। अब शिमला नगर निगम राजधानी को बाहर करने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका आरोप है कि स्मार्ट सिटी चयन में राजनीति हुई और इसके लिए बनी कमेटी की बैठक में सदस्य होने के बावजूद उन्हें नहीं बुलाया गया।