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Shimla News: ढाबा मालिक को अफीम तस्करी के मामले में 3 वर्ष का कारावास
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फागू के ढाबे से बरामद की थी 60.170 ग्राम अफीम और 120 नशीली गोलियां
35 हजार रुपये का जुर्माना भी करना होगा अदा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। एनडीपीएस एवं सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने नशीले पदार्थों की बिक्री के मामले में एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है।
अदालत ने ठियोग तहसील के फागू स्थित जीत ढाबा के मालिक को अफीम और नशीली गोलियों के मामले में दोषी ठहराते हुए 3 साल के कठोर कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को 6 महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 23 जुलाई 2020 की शाम स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट की टीम फागू क्षेत्र में गश्त पर थी। इस दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि जीत ढाबा का मालिक दोषी जीत राम अपने ढाबे से अफीम और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री कर रहा है।
पुलिस ने स्वतंत्र गवाहों को साथ लेकर ढाबे की तलाशी ली जहां टेबल के नीचे छिपाकर रखे एक गत्ते के डिब्बे से 60.170 ग्राम अफीम और 120 नशीली गोलियां बरामद हुई थीं। इसके बाद पुलिस स्टेशन ठियोग में एनडीपीएस कानून की धारा 18 और 21 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्वतंत्र गवाह अदालत में अपने बयानों से मुकर गए थे। हालांकि अदालत ने अपने 29 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया कि गवाहों ने जब्ती ज्ञापन पर अपने हस्ताक्षर की बात स्वीकार की है और मौके पर उनकी मौजूदगी साबित हुई है। अदालत ने पाया कि पुलिस अधिकारियों की गवाही और बरामदगी की कागजी तथा रासायनिक रिपोर्ट की कड़ी पूरी तरह से मजबूत है। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस कोई राजस्व रिकॉर्ड या सरकारी दस्तावेज पेश नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो सके कि जीत राम ही ढाबे का वास्तविक मालिक है। अदालत ने आरोपी के स्वामित्व वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भले ही राजस्व रिकॉर्ड न लाया गया हो, लेकिन घटना के समय ढाबे में जीत राम की उपस्थिति पूरी तरह सिद्ध है और वह नशे के बारे में अपनी अनभिज्ञता को साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोषी को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 18 के तहत 2 साल के कठोर कारावास और 15,000 रुपये जुर्माने और धारा 22 के तहत तीन साल के कठोर कारावास और 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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35 हजार रुपये का जुर्माना भी करना होगा अदा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। एनडीपीएस एवं सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने नशीले पदार्थों की बिक्री के मामले में एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है।
अदालत ने ठियोग तहसील के फागू स्थित जीत ढाबा के मालिक को अफीम और नशीली गोलियों के मामले में दोषी ठहराते हुए 3 साल के कठोर कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को 6 महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 23 जुलाई 2020 की शाम स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट की टीम फागू क्षेत्र में गश्त पर थी। इस दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि जीत ढाबा का मालिक दोषी जीत राम अपने ढाबे से अफीम और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री कर रहा है।
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पुलिस ने स्वतंत्र गवाहों को साथ लेकर ढाबे की तलाशी ली जहां टेबल के नीचे छिपाकर रखे एक गत्ते के डिब्बे से 60.170 ग्राम अफीम और 120 नशीली गोलियां बरामद हुई थीं। इसके बाद पुलिस स्टेशन ठियोग में एनडीपीएस कानून की धारा 18 और 21 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्वतंत्र गवाह अदालत में अपने बयानों से मुकर गए थे। हालांकि अदालत ने अपने 29 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया कि गवाहों ने जब्ती ज्ञापन पर अपने हस्ताक्षर की बात स्वीकार की है और मौके पर उनकी मौजूदगी साबित हुई है। अदालत ने पाया कि पुलिस अधिकारियों की गवाही और बरामदगी की कागजी तथा रासायनिक रिपोर्ट की कड़ी पूरी तरह से मजबूत है। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस कोई राजस्व रिकॉर्ड या सरकारी दस्तावेज पेश नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो सके कि जीत राम ही ढाबे का वास्तविक मालिक है। अदालत ने आरोपी के स्वामित्व वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भले ही राजस्व रिकॉर्ड न लाया गया हो, लेकिन घटना के समय ढाबे में जीत राम की उपस्थिति पूरी तरह सिद्ध है और वह नशे के बारे में अपनी अनभिज्ञता को साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोषी को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 18 के तहत 2 साल के कठोर कारावास और 15,000 रुपये जुर्माने और धारा 22 के तहत तीन साल के कठोर कारावास और 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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