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Shimla News: लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे चिट्टा तस्कर, पुलिस के पास गश्त के लिए गाड़ी न टैक्सी
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खास खबर...
राजधानी समेत जिलाभर के सात थानों के पास गश्त के लिए नहीं हैं गाड़ियां, बिल पास न होने से टैक्सी भी नहीं मिल रही
जिला स्तरीय एनकोर्ड समिति की बैठक में पुलिस ने बताई परेशानी, बोले-बिना गाड़ी कैसे पकड़ें तस्कर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टे का कारोबार करने वाले तस्कर लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं तो इन्हें पकड़ने का जिम्मा संभाल रही शिमला पुलिस के पास गश्त के लिए गाड़ियां तक नहीं हैं। यही नहीं बिल पास करने में हो रही देरी से अब टैक्सी सुविधा तक नहीं मिल रही।
हालत यह है कि राजधानी समेत जिलाभर के सात पुलिस थानों के पास गश्त करने के लिए कई महीने से गाड़ियां नहीं हैं। मजबूरन पुलिस जवान अपने पैसों से गाड़ी में तेल भरवाकर गश्त कर रहे हैं। जिला स्तरीय एनकोर्ड समिति की समीक्षा बैठक में पुलिस विभाग के अधिकारियों ने उपायुक्त अनुपम कश्यप के सामने अपनी परेशानी बताई। कहा कि चिट्टे के खिलाफ चल रहे अभियान में शिमला पुलिस प्रदेशभर में नंबर वन है। जिले में कई बड़े गिरोह पकड़े जा चुके हैं लेकिन अब हालत ऐसी है कि चिट्टे के तस्कर तो लग्जरी गाड़ियों में कारोबार करते पकड़े जा रहे हैं, लेकिन इस पर कार्रवाई करने वाली पुलिस खुद बिना गाड़ी के गश्त कर रही है। सरकार के चिट्टे के खिलाफ चलाए अभियान में जिला पुलिस दिनरात काम कर रही है लेकिन सुविधाएं न मिलने से पुलिस जवान निराश हैं। पेट्रोलिंग गाड़ियां न होने से थानों की पुलिस रात्रि गश्त तक नहीं कर पा रही। पुलिस जवान बाइक या अपने वाहनों में गश्त कर रहे हैं। यदि वाहन सुविधा मिले तो न सिर्फ गश्त पुख्ता होगी बल्कि चिट्टे के खिलाफ चल रहे अभियान में भी और तेजी आएगी। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि इस बारे में प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। सरकार से पुलिस थानों के लिए वाहनों की मांग की जाएगी।
इन थानों के पास नहीं हैं पेट्रोलिंग के लिए गाड़ी
राजधानी के छोटा शिमला, न्यू शिमला, सुन्नी, रोहड़ू, जुब्बल, चिढ़गांव, ननखड़ी थानों के पास एक भी पेट्रोलिंग वाहन नहीं है। यदि क्षेत्र में कहीं हादसा या वारदात हो जाए तो जवान निजी गाड़ियों में मौके पर पहुंचते हैं। इससे कई बार देरी भी होती है। झाकड़ी थाना पुलिस के पास एसजेवीएन की दी गई गाड़ी से पेट्रोलिंग हो रही है। जिले में 22 थाने हैं। वहीं, 34 पुलिस चौकियां हैं। एक भी पुलिस चौकी में पेट्रोलिंग वाहन नहीं है।
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अहम इनसेट
चिट्टे के साथ सुरक्षा, ट्रैफिक, वीआईपी ड्यूटी का भी जिम्मा
राजधानी के थानों में चिट्टे के अलावा सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक सुचारु रखने की भी जिम्मेदारी है। शिमला शहर में सचिवालय, विधानसभा, हाईकोर्ट समेत कई बड़े संस्थान हैं। सैलानियों का भी यहां पूरा साल आना-जाना रहता है। इसके अलावा वीआईपी ड्यूटी की भी जिम्मेदारी है। इतना काम होने के बावजूद थानों में गाड़ियां तक नहीं हैं।
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राजधानी समेत जिलाभर के सात थानों के पास गश्त के लिए नहीं हैं गाड़ियां, बिल पास न होने से टैक्सी भी नहीं मिल रही
जिला स्तरीय एनकोर्ड समिति की बैठक में पुलिस ने बताई परेशानी, बोले-बिना गाड़ी कैसे पकड़ें तस्कर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टे का कारोबार करने वाले तस्कर लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं तो इन्हें पकड़ने का जिम्मा संभाल रही शिमला पुलिस के पास गश्त के लिए गाड़ियां तक नहीं हैं। यही नहीं बिल पास करने में हो रही देरी से अब टैक्सी सुविधा तक नहीं मिल रही।
हालत यह है कि राजधानी समेत जिलाभर के सात पुलिस थानों के पास गश्त करने के लिए कई महीने से गाड़ियां नहीं हैं। मजबूरन पुलिस जवान अपने पैसों से गाड़ी में तेल भरवाकर गश्त कर रहे हैं। जिला स्तरीय एनकोर्ड समिति की समीक्षा बैठक में पुलिस विभाग के अधिकारियों ने उपायुक्त अनुपम कश्यप के सामने अपनी परेशानी बताई। कहा कि चिट्टे के खिलाफ चल रहे अभियान में शिमला पुलिस प्रदेशभर में नंबर वन है। जिले में कई बड़े गिरोह पकड़े जा चुके हैं लेकिन अब हालत ऐसी है कि चिट्टे के तस्कर तो लग्जरी गाड़ियों में कारोबार करते पकड़े जा रहे हैं, लेकिन इस पर कार्रवाई करने वाली पुलिस खुद बिना गाड़ी के गश्त कर रही है। सरकार के चिट्टे के खिलाफ चलाए अभियान में जिला पुलिस दिनरात काम कर रही है लेकिन सुविधाएं न मिलने से पुलिस जवान निराश हैं। पेट्रोलिंग गाड़ियां न होने से थानों की पुलिस रात्रि गश्त तक नहीं कर पा रही। पुलिस जवान बाइक या अपने वाहनों में गश्त कर रहे हैं। यदि वाहन सुविधा मिले तो न सिर्फ गश्त पुख्ता होगी बल्कि चिट्टे के खिलाफ चल रहे अभियान में भी और तेजी आएगी। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि इस बारे में प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। सरकार से पुलिस थानों के लिए वाहनों की मांग की जाएगी।
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इन थानों के पास नहीं हैं पेट्रोलिंग के लिए गाड़ी
राजधानी के छोटा शिमला, न्यू शिमला, सुन्नी, रोहड़ू, जुब्बल, चिढ़गांव, ननखड़ी थानों के पास एक भी पेट्रोलिंग वाहन नहीं है। यदि क्षेत्र में कहीं हादसा या वारदात हो जाए तो जवान निजी गाड़ियों में मौके पर पहुंचते हैं। इससे कई बार देरी भी होती है। झाकड़ी थाना पुलिस के पास एसजेवीएन की दी गई गाड़ी से पेट्रोलिंग हो रही है। जिले में 22 थाने हैं। वहीं, 34 पुलिस चौकियां हैं। एक भी पुलिस चौकी में पेट्रोलिंग वाहन नहीं है।
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चिट्टे के साथ सुरक्षा, ट्रैफिक, वीआईपी ड्यूटी का भी जिम्मा
राजधानी के थानों में चिट्टे के अलावा सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक सुचारु रखने की भी जिम्मेदारी है। शिमला शहर में सचिवालय, विधानसभा, हाईकोर्ट समेत कई बड़े संस्थान हैं। सैलानियों का भी यहां पूरा साल आना-जाना रहता है। इसके अलावा वीआईपी ड्यूटी की भी जिम्मेदारी है। इतना काम होने के बावजूद थानों में गाड़ियां तक नहीं हैं।