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Shimla News: रिज मैदान पर उठी सोनम वांगचुक के रिहाई की मांग
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सिमला कलेक्टिव संस्था ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के आगे दिया धरना
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का आग्रह
जलवायु प्रेरित आपदाओं पर जताई गई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक रिज मैदान पर सिमला कलेक्टिव संस्था ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास शांतिपूर्ण धरना देकर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग उठाई। इसके साथ ही हिमाचल और समूचे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रही जलवायु प्रेरित आपदाओं पर चिंता जताई।
हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस तरह महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के रास्ते से आंदोलन चलाया उसी तरह वांगचुक भी भूख हड़ताल जैसे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। बावजूद इसके उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत जेल भेजना लोकतांत्रिक मूल्यों पर कुठाराघात है। सभा में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में की थी। इसलिए अब इस वादे को निभाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई और उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल की अपील की।
सिमला कलेकटिव के सदस्यों ने कहा कि पिछले कुछ सालों में असामान्य बरसात, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है। उन्होंने चेताया कि अवैज्ञानिक विकास कार्य, अनियंत्रित पर्यटन और पर्यावरणीय संवेदनशीलता की अनदेखी से यह संकट और गहराता जा रहा है। सभा में पूर्व उपमहापौर टिकेंद्र सिंह पंवर, पूर्व आईएएस अधिकारी दीपक शानन, उमा महाजन, रावीन सिंह, विपिन गुप्ता, अधिवक्ता देवेन खन्ना, रंजीव कुठियाला, डॉ. बलदेव नेगी, मोहित घास्टा, संजीव खजूरिया और प्रतीक समेत डूअर्स संस्था, मानव विकास संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभा के अंत में प्रदर्शनकारियों ने महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और सतत विकास करो हिमालय बचाओ, सोनम वांगचुक को रिहा करो जैसे नारे लगाए।
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लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का आग्रह
जलवायु प्रेरित आपदाओं पर जताई गई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक रिज मैदान पर सिमला कलेक्टिव संस्था ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास शांतिपूर्ण धरना देकर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग उठाई। इसके साथ ही हिमाचल और समूचे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रही जलवायु प्रेरित आपदाओं पर चिंता जताई।
हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस तरह महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के रास्ते से आंदोलन चलाया उसी तरह वांगचुक भी भूख हड़ताल जैसे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। बावजूद इसके उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत जेल भेजना लोकतांत्रिक मूल्यों पर कुठाराघात है। सभा में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में की थी। इसलिए अब इस वादे को निभाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई और उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल की अपील की।
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सिमला कलेकटिव के सदस्यों ने कहा कि पिछले कुछ सालों में असामान्य बरसात, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है। उन्होंने चेताया कि अवैज्ञानिक विकास कार्य, अनियंत्रित पर्यटन और पर्यावरणीय संवेदनशीलता की अनदेखी से यह संकट और गहराता जा रहा है। सभा में पूर्व उपमहापौर टिकेंद्र सिंह पंवर, पूर्व आईएएस अधिकारी दीपक शानन, उमा महाजन, रावीन सिंह, विपिन गुप्ता, अधिवक्ता देवेन खन्ना, रंजीव कुठियाला, डॉ. बलदेव नेगी, मोहित घास्टा, संजीव खजूरिया और प्रतीक समेत डूअर्स संस्था, मानव विकास संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभा के अंत में प्रदर्शनकारियों ने महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और सतत विकास करो हिमालय बचाओ, सोनम वांगचुक को रिहा करो जैसे नारे लगाए।
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