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Himachal News: देहरा जू में बनेगा 4 करोड़ का थीमैटिक गार्डन, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किया शुभारंभ
Fri, 24 Jul 2026 01:02 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 24 Jul 2026 01:02 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में इको-टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा के देहरा स्थित दुर्गेश अरण्य अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान में 4 करोड़ रुपये की थीमैटिक गार्डन परियोजना का शुभारंभ किया। करीब 22 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस गार्डन में फिकेरियम, आर्बोरेटम, बैंबूसेटम और वॉच टावर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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थीमैटिक गार्डन परियोजना के लिए चार करोड़ रुपये की राशि जारी।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के देहरा स्थित दुर्गेश अरण्य अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान में विकसित होने वाली महत्वाकांक्षी थीमैटिक गार्डन परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना के लिए उन्होंने 4 करोड़ रुपये की राशि जारी की।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना हिमाचल प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लगभग 22,247 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित होने वाला यह थीमैटिक गार्डन आगंतुकों को प्रदेश की वनस्पतियों और प्राकृतिक धरोहर से रूबरू कराएगा।
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परियोजना के तहत फिकेरियम विकसित किया जाएगा, जहां फाइकस की विभिन्न प्रजातियों का प्रदर्शन होगा। इसके अलावा आर्बोरेटम में देशी और विदेशी प्रजातियों के पेड़ों का संग्रह तैयार किया जाएगा, जिससे पर्यावरण शिक्षा और वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।
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पर्यटकों के लिए यहां वॉच टावर का निर्माण भी किया जाएगा, जहां से आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया जा सकेगा। वहीं बैंबूसेटम में विभिन्न बांस प्रजातियों का प्रदर्शन कर उनकी पारिस्थितिकीय और आर्थिक उपयोगिता से लोगों को परिचित कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए जैव विविधता को समझने का उत्कृष्ट केंद्र बनेगी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग की इस परियोजना को तैयार करने के प्रयासों की सराहना भी की। उन्होंने बताया कि परियोजना का क्रियान्वयन मुख्य वन्यजीव संरक्षक, हिमाचल प्रदेश द्वारा किया जाएगा, जबकि हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।