एचपीयू शिमला में शिक्षकों की भर्ती शुरू करने पर फैसला जल्द
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चुनाव आचार संहिता के हट जाने के बाद अब विश्वविद्यालय में खाली चल रहे शिक्षकों के पदों के भरने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय को शिक्षक भर्ती में आरक्षण रोस्टर का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण लटकी शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को भी शुरू करने के लिए रास्ता साफ हो चुका है।
विश्वविद्यालय को शिक्षक भर्ती के लिए सबसे पहले सर्वोच्च न्यायालय के 13 प्वाइंट के आरक्षण रोस्टर को लागू करने को लेकर यूजीसी को दिए गए आदेशों के मुताबिक प्रक्रिया जल्द शुरू करनी होगी।
इसी माह 31 मई को संभावित कार्यकारी परिषद की बैठक में नए नियमों और यूजीसी के आदेशों को अपनाने का मामला और गैर शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया का मामला मुख्य एजेंडा होगा। ईसी में नए नियमों को अपनाने के बाद ही विश्वविद्यालय शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर पाएगा।
नए आदेशों पर ही आरक्षण को लागू कर विभागवार सीटें आरक्षित वर्ग के लिए रखे जाने पर फैसला हो सकेगा। उसी के मुताबिक हर विभाग की सीटें तय होंगी, तो ही पद विज्ञापित किए जा सकेंगे।
नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने और विवि सहित विभिन्न संस्थानों में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों के कारण यहां पढ़ने वाले या नए प्रवेश लेने वाले छात्रों को समय रहते शिक्षकों की व्यवस्था करना, विवि के लिए एक चुनौति रहेगी।
भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने पर जल्द लिया जाएगा फैसला
इससे निपटने के लिए विवि को एक बार फिर से यूजीसी के गेस्ट फैकल्टी चुने जाने को लागू यूजीसी के नए नियमों और मानदेय के मुताबिक चयन और तैनाती करने के सिवा कोई चारा शेष नहीं है।
विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी डॉ. रणवीर वर्मा ने माना कि अब जबकि आदर्श चुनाव आचार संहिता समाप्त हो चुकी है। अब शिक्षक और गैर शिक्षकों के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने पर जल्द फैसला ले लिया जाएगा।
छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए विभागों और संस्थानों में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों पर गेस्ट फैकल्टी की व्यवस्था कर दी जाएगी, जिससे हर कोर्स में अध्यापन कार्य प्रभावित न हो इसका विशेष ख्याल रखा जाएगा।