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Shimla News: विधि विवि से हटाए दैनिक भोगियों का डीसी ऑफिस के बाहर हल्ला बोल
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शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय घण्डल से निकाले गए कर्मचारियों
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विश्वविद्यालय प्रशासन पर कानून की अनदेखी कर सेवाएं समाप्त करने का लगाया आरोप
श्रम विभाग, सरकार से न्याय दिलवाने की मांग
कर्मियों की सेवाएं बहाल न करने पर सीटू ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय घंडल से हाल ही में हटाए 43 और पूर्व में हटाए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर हल्ला बोला।
सीटू के बैनर तले किए आंदोलन में कर्मचारियों के अलावा सीटू कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए। उन्होंने विश्वविद्यालय पर गैर कानूनी तरीके से और कानूनों की अनदेखी कर दैनिक भोगी कर्मचारियों को हटाए जाने के विरोध और विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। सीटू ने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के कदम व विश्वविद्यालय प्रशासन के व्यवहार को तानाशाही करार दिया। प्रदर्शन में सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, उपाध्यक्ष जगत राम, जिलाध्यक्ष कुलदीप डोगरा, कोषाध्यक्ष बालक राम, विवेक कश्यप, वीरेंद्र लाल, सरीना, उमा, चमन, प्रताप चौहान, पूर्ण चंद, कपिल नेगी, रामप्रकाश, आशा, पंकज, हेमराज, रजनीश, चंद्रमोहन, हेमंत, धर्मेंद्र, रणधीर, मीरा, राजेश, दुर्गादत्त, पुष्पेंद्र, ज्योति, रामप्यारी, रचना, चंदन, हेमा, दीपशिखा, अनीता, निर्मला, जीत, सोहन लाल, हनींद्र, अनूप आदि शामिल रहे।
सीटू ने चेताया है कि अगर कर्मचारियों को हटाने के फैसले को वापस न लिया, उनकी सेवाओं को बहाल न किया, तो आने वाले समय में सीटू आंदोलन को और तीखा करेगी । सीटू नेता विजेंद्र मेहरा, जगत राम, कुलदीप डोगरा, प्रदीप सिंह बालक राम, विवेक कश्यप, विरेंद्र लाल, कपिल नेगी, आशा, पंकज, रजनीश कुमार व हेमराज ने श्रम विभाग के साथ प्रदेश सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने, कर्मचारियों को न्याय दिलवाने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि आंदोलन के अगले चरण में प्रदर्शन श्रम कार्यालय शिमला के बाहर होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों को कानून की पढ़ाई करवाने वाले विधि विश्वविद्यालय में सरेआम कानून का गला घोंटा जा रहा है। मजदूरों को हायर एंड फायर नीति के तहत गैर कानूनी तरीके से नौकरी से निकालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इन कर्मचारियों ने छह-छह साल का बहुमूल्य समय विश्वविद्यालय में 12-12 घंटे तक सफाई, सुरक्षा, हॉस्टल अटेंडेंट, ड्राइवर, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर सहित तकनीकी कार्यों में दिया है। कर्मचारियों ने सेवाओं को बहाल करने, 90 दिन बाद ब्रेक देना बंद करने, दैनिक भोगी कर्मचारियों को पहले की तरह नियमित किए जाने और गैर कानूनी तरीके से छंटनी बंद करने की मांग की।
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श्रम विभाग, सरकार से न्याय दिलवाने की मांग
कर्मियों की सेवाएं बहाल न करने पर सीटू ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय घंडल से हाल ही में हटाए 43 और पूर्व में हटाए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर हल्ला बोला।
सीटू के बैनर तले किए आंदोलन में कर्मचारियों के अलावा सीटू कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए। उन्होंने विश्वविद्यालय पर गैर कानूनी तरीके से और कानूनों की अनदेखी कर दैनिक भोगी कर्मचारियों को हटाए जाने के विरोध और विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। सीटू ने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के कदम व विश्वविद्यालय प्रशासन के व्यवहार को तानाशाही करार दिया। प्रदर्शन में सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, उपाध्यक्ष जगत राम, जिलाध्यक्ष कुलदीप डोगरा, कोषाध्यक्ष बालक राम, विवेक कश्यप, वीरेंद्र लाल, सरीना, उमा, चमन, प्रताप चौहान, पूर्ण चंद, कपिल नेगी, रामप्रकाश, आशा, पंकज, हेमराज, रजनीश, चंद्रमोहन, हेमंत, धर्मेंद्र, रणधीर, मीरा, राजेश, दुर्गादत्त, पुष्पेंद्र, ज्योति, रामप्यारी, रचना, चंदन, हेमा, दीपशिखा, अनीता, निर्मला, जीत, सोहन लाल, हनींद्र, अनूप आदि शामिल रहे।
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सीटू ने चेताया है कि अगर कर्मचारियों को हटाने के फैसले को वापस न लिया, उनकी सेवाओं को बहाल न किया, तो आने वाले समय में सीटू आंदोलन को और तीखा करेगी । सीटू नेता विजेंद्र मेहरा, जगत राम, कुलदीप डोगरा, प्रदीप सिंह बालक राम, विवेक कश्यप, विरेंद्र लाल, कपिल नेगी, आशा, पंकज, रजनीश कुमार व हेमराज ने श्रम विभाग के साथ प्रदेश सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने, कर्मचारियों को न्याय दिलवाने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि आंदोलन के अगले चरण में प्रदर्शन श्रम कार्यालय शिमला के बाहर होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों को कानून की पढ़ाई करवाने वाले विधि विश्वविद्यालय में सरेआम कानून का गला घोंटा जा रहा है। मजदूरों को हायर एंड फायर नीति के तहत गैर कानूनी तरीके से नौकरी से निकालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इन कर्मचारियों ने छह-छह साल का बहुमूल्य समय विश्वविद्यालय में 12-12 घंटे तक सफाई, सुरक्षा, हॉस्टल अटेंडेंट, ड्राइवर, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर सहित तकनीकी कार्यों में दिया है। कर्मचारियों ने सेवाओं को बहाल करने, 90 दिन बाद ब्रेक देना बंद करने, दैनिक भोगी कर्मचारियों को पहले की तरह नियमित किए जाने और गैर कानूनी तरीके से छंटनी बंद करने की मांग की।