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Shimla News: हजारों लोगों ने जैईश्वरी माता के मंदिर में नवाया शीश
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दशहरा पर्व पर धरेच मंदिर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। कसुम्पटी के धरेच में जैईश्वरी माता मंदिर में दशहरा पर्व पर रविवार को हजारों लोगों ने माता के दर्शन किए। धरेच में माता नगरकोटी का प्राचीन मंदिर है जहां पर हर वर्ष दशहरा उत्सव पर मेले का आयोजन होता है। रतेश, फागू, क्योंथल और धरेच क्षेत्र के लोग मंदिर में मन्नतें पूरी होने पर आते हैं। लोग अपने छोटे बच्चों के मुंडन करवाने आते हैं। माता के बजीर शिव राम शर्मा के अनुसार जैईश्वरी नगरकोटी माता बहुत प्रत्यक्ष देवी है और अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है। विशेषकर निःसंतान दंपतियों की गोद देवी निश्चित रूप से भर देती है। उन्होंने बताया कि परंपरा के अनुसार हर वर्ष शरद नवरात्र की दुर्गा अष्टमी पर जैईश्वरी माता धरेच का प्राचीन वाद्य यंत्रों, ढोल-नगाड़ों व शहनाई के साथ केलिया घाट स्थित प्राचीन मंदिर अर्थात मौंड़ में आगमन होता है जहां पर माता चौदश तिथि तक भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान रहती हैं। इस बार माता 17 अक्तूबर को पूर्णिमा को वापस अपने मंदिर धरेच में लौट जाएंगी।
बजीर शिव राम शर्मा ने बताया कि अतीत में इस मंदिर में बलि प्रथा हुआ करती थी, जिसे कई वर्षों पहले मंदिर कमेटी ने बंद कर दिया है। इस आठ दिवसीय पर्व में सबसे बड़ा मेला दशहरे के दूसरे दिन एकादशी को लगता है। इसमें माता के दर्शनों के लिए जन सैलाब उमड़ता है। मंदिर में चावल के दाने प्रसाद रूप में दिए जाते हैं। जिसे लोग अपने घरों में रखते हैं ताकि किसी नकारात्मक शक्ति का घर में प्रवेश न हो। मंदिर में आठ दिन तक लंगर का आयोजन किया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। कसुम्पटी के धरेच में जैईश्वरी माता मंदिर में दशहरा पर्व पर रविवार को हजारों लोगों ने माता के दर्शन किए। धरेच में माता नगरकोटी का प्राचीन मंदिर है जहां पर हर वर्ष दशहरा उत्सव पर मेले का आयोजन होता है। रतेश, फागू, क्योंथल और धरेच क्षेत्र के लोग मंदिर में मन्नतें पूरी होने पर आते हैं। लोग अपने छोटे बच्चों के मुंडन करवाने आते हैं। माता के बजीर शिव राम शर्मा के अनुसार जैईश्वरी नगरकोटी माता बहुत प्रत्यक्ष देवी है और अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है। विशेषकर निःसंतान दंपतियों की गोद देवी निश्चित रूप से भर देती है। उन्होंने बताया कि परंपरा के अनुसार हर वर्ष शरद नवरात्र की दुर्गा अष्टमी पर जैईश्वरी माता धरेच का प्राचीन वाद्य यंत्रों, ढोल-नगाड़ों व शहनाई के साथ केलिया घाट स्थित प्राचीन मंदिर अर्थात मौंड़ में आगमन होता है जहां पर माता चौदश तिथि तक भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान रहती हैं। इस बार माता 17 अक्तूबर को पूर्णिमा को वापस अपने मंदिर धरेच में लौट जाएंगी।
बजीर शिव राम शर्मा ने बताया कि अतीत में इस मंदिर में बलि प्रथा हुआ करती थी, जिसे कई वर्षों पहले मंदिर कमेटी ने बंद कर दिया है। इस आठ दिवसीय पर्व में सबसे बड़ा मेला दशहरे के दूसरे दिन एकादशी को लगता है। इसमें माता के दर्शनों के लिए जन सैलाब उमड़ता है। मंदिर में चावल के दाने प्रसाद रूप में दिए जाते हैं। जिसे लोग अपने घरों में रखते हैं ताकि किसी नकारात्मक शक्ति का घर में प्रवेश न हो। मंदिर में आठ दिन तक लंगर का आयोजन किया जाता है।
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