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अब घर में उगाओ कैंसर से लड़ने वाली मशरूम

Mon, 11 Jan 2016 09:19 AM IST
Updated Mon, 11 Jan 2016 09:19 AM IST
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cultivation of mushroom at home which is useful for cancer patients.

कैंसर से लड़ने वाली जापान की अप्रूवड ड्रग लैंटाइनन के मुख्य स्रोत और औषधीय गुणों से भरपूर शिटाके-388 एस मशरूम को अब आप महज 45 दिन में अपने घर या किचन गार्डन में उगा सकते हैं। मशरूम सिटी सोलन के खुंब अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ने दो सालों की कड़ी मेहनत के बाद इस किस्म का अनोखा बीज तैयार किया है।

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पेड़ों के बुरादे से तैयार छोटे बैग्स में इस मशरूम को तैयार किया जा सकेगा। जबकि पारंपरिक और अन्य विधियों से मशरूम को उगाने में 90 दिन लगते हैं। अब इस मशरूम को आप कहीं भी आसानी से नियंत्रित तापमान में उगा सकते हैं। वैज्ञानिकों के
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मुताबिक यह मशरूम एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी ऐजिंग के गुणों के साथ-साथ विटामिन डी का भी काफी अच्छा स्रोत है। यह विशेष बीज मशरूम रिसर्च सेंटर या सब सेंटर में ही उपलब्ध रहेगा। शीशम और सफेदे का बुरादा गीला करके उसमें 20 फीसदी चोकर मिलाई जाती है।

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70 रुपये किलो बीज में 40 किलो उत्पादन

cultivation of mushroom at home which is useful for cancer patients.

इसे पोली प्रॉपीलेन बैग में भरा जाता है। यह बैग आसानी से बाजार में उपलब्ध है। इसमें तीन फीसदी बीज डाला जाता है। इसके बाद 25 डिग्री के तापमान में इसे 30-35 दिन तक रखा जाता है। मशरूम उगने लगती है। इसके बाद थैलियों को हटा लिया जाता है। 45 दिन में पैदावार बेचने के लिए तैयार हो जाती है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि इस किस्म का एक किलोग्राम बीज 35 से 40 किलोग्राम मशरूम की पैदावार दे सकेगा। यह बीज मशरूम अनुसंधान केंद्रों में 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलता है। शिटाके मशरूम की इस किस्म की खासी डिमांड है। औषधीय गुण होने के चलते स्थानीय बाजार में ही 500 रुपये प्रतिकिलो तक दाम मिल जाते हैं।

खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिकों की दो वर्षों की मेहनत के बाद यह सफलता हाथ लगी है। बीज तैयार किया जा चुका है। यह देश भर के 32 केंद्रों में उपलब्ध है। इस बीज के पेटेंट के लिए अप्लाई कर दिया गया है। डीएमआरओ-शिटाके 388 एस नाम से बीज का पेटेंट होगा।

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