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इस गांव के बाशिंदे गंदा पानी पीने को मजबूर, वीडियो वायरल होने के बाद सीएस ने तलब की रिपोर्ट
Sat, 20 Jul 2019 09:25 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोहर (मंडी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोहर (मंडी)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 20 Jul 2019 09:25 PM IST
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ग्रामीणों को गंदे पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा।
- फोटो : अमर उजाला
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चौहारघाटी की लटराण पंचायत के कुफरधार गांव के ग्रामीणों को गंदे पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। कुछ लोगों ने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट कर सरकार से इसकी शिकायत की है। इसके बाद मुख्य सचिव ने मंडी डीसी से रिपोर्ट तलब की।
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एसडीएम पधर ने मौके का दौरा किया और जांच परख की। इसमें सामने आया है कि खेती बाड़ी के लिए ग्रामीण अपने घर से पानी खुद ले जाते हैं। इसमें वायरल वीडियो में बताई जा रही समस्या को प्रशासन ने नकारा है।
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ग्रामीणों के अनुसार कुफरधार के बाशिंदों के लिए आईपीएच विभाग ने कोई भी पेयजल योजना नहीं बनाई है। ऐसे में ग्रामीणों को जंगल में गड्ढे खोद कर बारिश के इकट्ठे किए गए पानी से अपना गुजारा करना पड़ रहा है।
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इस गंदे पानी से जहां ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते हैं वहीं अपने पालतू मवेशियों को भी यही पानी पिलाया जाता है। इससे गांव में महामारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने पर मुख्य सचिव ने कड़ा संज्ञान लिया।
एसडीएम पधर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी
गंदे पानी का वायरल वीडियो
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने एडीसी मंडी आशुतोष गर्ग को मामले में छानबीन के आदेश दिए थे। इस पर उन्होंने एसडीएम पधर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम पधर मौके पर पहुंचे और छानबीन की।
छानबीन में सामने आया है कि वहां कोई स्थायी रिहायश नहीं है। खेतीबाड़ी के लिए ग्रामीण सीजन के दौरान यहां जाते हैं। गांव यहां से करीब 45 मिनट की दूरी पर है। प्रशासन की जांच में सामने आया है कि ग्रामीण पेयजल साथ लेकर जाते हैं।
यह भी पाया गया है कि यहां एक पाइप लाइन थी। जिसे अब दुरुस्त किया जाएगा। एडीसी मंडी आशुतोष गर्ग ने बताया कि मुख्य सचिव के आदेश पर छानबीन की गई है। इसमें गंदा पानी पीने को लेकर कोई तथ्य नहीं पाए गए हैं। ग्रामीण खेतीबाड़ी के लिए घर से ही पेयजल ले जाते हैं। लिखित रिपोर्ट भी भेज दी गई है।
छानबीन में सामने आया है कि वहां कोई स्थायी रिहायश नहीं है। खेतीबाड़ी के लिए ग्रामीण सीजन के दौरान यहां जाते हैं। गांव यहां से करीब 45 मिनट की दूरी पर है। प्रशासन की जांच में सामने आया है कि ग्रामीण पेयजल साथ लेकर जाते हैं।
यह भी पाया गया है कि यहां एक पाइप लाइन थी। जिसे अब दुरुस्त किया जाएगा। एडीसी मंडी आशुतोष गर्ग ने बताया कि मुख्य सचिव के आदेश पर छानबीन की गई है। इसमें गंदा पानी पीने को लेकर कोई तथ्य नहीं पाए गए हैं। ग्रामीण खेतीबाड़ी के लिए घर से ही पेयजल ले जाते हैं। लिखित रिपोर्ट भी भेज दी गई है।