छेड़छाड़ रोकने को कॉलेज का अजीबोगरीब फैसला?
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हिमाचल के पीजी कालेज ऊना में दो छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में वीरवार को कॉलेज प्रशासन ने एक बड़ा ही अजीबों गरीब फैसला सुना दिया।
कॉलेज में हुई एंटी रैगिंग और अनुशासन कमेटी की बैठक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पर तो ज्यादा चर्चा नहीं हुई। लेकिन बैठक में छात्रों के मोबाइल इस्तेमाल पर बैन जरूर लगा दिया गया।
इस बैठक में कमेटी सदस्यों के साथ पीड़ित दोनों छात्राएं भी मौजूद रहीं। वहीं बैठक में एक छात्रा के अभिभावक भी मौजूद रहे। उधर, छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।
फैसला नहीं माना तो जब्त होंगे फोन
प्रिंसिपल ने कहा कि महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं के कालेज में मोबाइल के प्रयोग करने पर पाबंदी करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि मोबाइल का प्रयोग करने पर मोबाइल जब्त किए जाएंगे तथा विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी सूचित किया गया है। उन्होंने कहा कि छात्राओं से छेड़छाड़ मामले में आरोपी युवकों की पहचान हो गई है।
वहीं, सरेआम कैंटीन में छेड़छाड़ करने वाले आरोपियों की पहचान होने के बावजूद भी कोई कठोर कदम नहीं उठाया जा रहा। इससे कालेज प्रशासन की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आ गई है। क्या कालेज प्रशासन पर राजनीतिक दबाव है?
कॉलेज ने गहन जांच का किया दावा
इस बैठक में कालेज प्रशासन ने बाहरी तत्वों पर पूर्णत: रोक लगाने सहित अन्य गंभीर मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। कालेज प्राचार्य डा. एसके चावला ने बताया कि महाविद्यालय में छात्राओं के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले को लेकर गहनता से जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में बाहरी युवकों पर पूर्णत: रोक लगाई गई है। इसके बावजूद यदि कोई आउटसाइडर्स कालेज में पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।