हिमाचल बस हादसाः अब तक 13 लोगों की मौत
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मंगलवार सुबह चार घायलों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें पीजीआई चंडीगड़ रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार बस(यूपी 011एपी 0178) रेणुका पांवटा सड़कमार्ग से सहारनपुर की ओर जा रही थी। बस में यूपी के सहारनपुर क्षेत्र के 55 लोग सवार थे। सभी रेणुका माता मंदिर से दर्शन कर वापिस लौट रहे थे।
हादसा उस समय हुआ जब बस चालक भूलवश पंजाहल-नाहन मार्ग पर ले गया। जब किसी के बताने पर वह गाड़ी को पांवटा मार्ग पर ले जाने के लिए बैक कर रहा था तो गाड़ी गहरी खाई में जा गिरी।
घायलों का उपचार जारी
32 घायलों को ददाहू के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जबकि बाकी 2 घायलों का उपचार नाहन अस्पताल में चल रहा है। इनमें अधिकतर लोगों को गंभीर चोटें लगी है। पुलिस का कहना है कि हादसा कैसे हुआ, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस ने मंगलवार सुबह भी दुर्घटना स्थल की पड़ताल की ताकि देर रात अंधेरे में कोई घायल खाई में ही न रह गया हो। सर्च ऑपरेशन में कोई भी घायल नहीं मिला है। पुलिस मृतकों की शिनाख्त करने का काम कर रही है।
हालांकि सवाल यह भी है कि जब यह सड़क 42 सीटों वाली बसों के लिए ही है तो कैसे 55 सीटों वाली बस इस मार्ग में पहुंच गई। इसके लिए कहीं न कहीं स्थानीय प्रशासन भी जिम्मेदार है।
तड़के सुबह श्रद्घालुओं को लेकर रेणुका पहुंची थी बस
सभी श्रद्धालुओं ने शाम 5 बजे रेणुका माता के दर्शन किए। बस चालक बस को रेणुका से पांवटा वाया तिरमली होते हुए सहारनपुर के लिए लेकर जा रहा था।
बस मधारा मोड़ के पास बैक करते समय 250 फुट गहरी खाई में गिर गई। बस के घायल किशन पुरा निवासी रामकिशन भाटी, सुनील कुमार, विजय वर्मा, नाथी राम, विजय पाल एवं सूरज ने अमर उजाला को बताया कि बस को चालक बैक कर रहा था। बस अचानक खाई में गिर गई। उन्हें कुछ लोग लहु लुहान की हालत में ददाहू अस्पताल लेकर आए।
पुलिस ने शुरू की मृतकों की शिनाख्त
हादसे के बाद मृतकों की शिनाख्त की जा रही है। पुलिस ने घायल लोगों के बयान लेना शुरू कर दिया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि मृतकों में एक ही परिवार के कई लोग भी हो सकते हैं।
जल्द ही मृतकों की सूची जारी की जानी है। वहीं, पुलिस की टीमें अभी भी स्थानीय लोगों के साथ मिलकर खाई में तलाशी अभियान जारी रखे हुए हैं।
वहीं, घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को भी अलर्ट कर रखा है।
बस हादसे के घायलों की सूची
घायलों में अनिल बतरा, नाथी राम, राकेश कुमार, मंजीत सिंह, भावुक, अंजलि, कांता, संयम अरोड़ा, अंजलि-2, सुनील, रजत, अमरजीत सिंह, रामकिशन, अनुज बतरा, ज्योति, कमलेश, विधि, भावना, दिव्या, हरशीद, साइमा अरोड़ा, देवेंद्र कुमार, अनिल कुमार, ओम प्रकाश, अनिता, मंजू, कृष्णलाल धवन, सुनीता, मुंशी राम, कांता, कृष्णा, राजकुमार पंडित, केशवलाल, राजदुलारी, निर्मल शर्मा, मोहिनी अरोड़ा, सुनील कुमार, नेहा, विजयपाल, रजत और अशोक बतरा शामिल हैं।
6 महीने में गई 400 से ज्यादा की जान
अभी बीस दिन ही बीते हैं कि हिमाचल में दूसरे बड़े़ बस हादसे ने फिर से झकझोर दिया है। सिरमौर जिले में हुए इस हादसे ने एक बार फिर से पहाड़ी सफर के लिए सड़कों और इस पर परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
अभी 26 मई को ठियोग में देहा के पास एक बस हादसे में 14 लोगों की मौत की खबर ठंडी भी नहीं हुई कि अब इस नए हादसे ने फिर से हिला दिया है। हिमाचल में दुर्घटनाएं होने के बाद ही सरकार हरकत में आती है।
पिछले छह महीनों में हिमाचल में छोटे-बड़े लगभग 1515 हादसे हो चुके हैं। इन्हीं में बस दुर्घटनाएं भी हैं। एक दिसंबर से लेकर अब तक इन हादसों में तकरीबन 400 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। लगभग 3500 लोग इस बीच जख्मी हो चुके हैं। प्रदेश में हर साल औसतन 3300 के करीब हादसे हो रहे हैं।