मंत्री जी बोले, सड़क तो ठीक है फिर कैसे गिरी बस?
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ठियोग के पास हुए बस हादसे से खुद परिवहन मंत्री जीएस बाली भी हैरान हैं। दुर्घटना स्थल बहुत खतरनाक नहीं था। सड़क भी काफी चौड़ी थी और रास्ते में दिन की रोशनी थी।
ड्राइवर गाड़ी सही चला रहा था और टाटा मोटर्स की बस भी एकदम नई थी। फिर ऐसा क्या हुआ कि सवारियों से लदी बस खाई में जा गिरी।
मंत्री ने इस बारे में स्थानीय लोगों से भी बात की। हालांकि, कुछ लोग उनके तीन दिन बाद मौके पर पहुंचने को लेकर भी सवाल उठा रहे थे।
परिवहन मंत्री ने बनाई जांच कमेटी
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने इस रहस्य की जांच के लिए एक तकनीकी कमेटी गठित की है। कमेटी में लोक निर्माण विभाग, परिवहन निगम और विभाग के तकनीकी अधिकारियों के अलावा टाटा मोर्ट्ज के विशेषज्ञ अधिकारी भी शामिल होंगे ताकि दुर्घटना के सही कारणों की जानकारी प्राप्त हो सके।
यह तथ्य है कि दुर्घटना के समय बस ओवरलोड थी। सिर्फ तीन साल पहले सड़क पर उतरी टाटा मोटर्स की इस 37 सीटर बस में चालक परिचालक सहित करीब 74 यात्री सवार थे। ओवरलोडिंग के कारण बस स्पीड भी ज्यादा नहीं थी। सड़क काफी चौड़ी और पक्की थी। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण सड़क पर ट्रैफिक भी ज्यादा नहीं था।
बस बैक होकर खाई में गिरी है जिससे साफ होता है कि बस चालक की लापरवाही से दुर्घटना नहीं हुई है। तो क्या बस में कोई तकनीकी खराबी आने के कारण दुर्घटना हुई? यह बड़ा सवाल है।
पीड़ित परिवारों को निगम देगा मुआवजा
लेलू पुल बस हादसे के तीन दिन बाद परिवहन मंत्री जीएस बाली ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने कहा कि हादसे में मारे गए सभी लोगों के परिजनों को निगम की ओर से मुआवजा दिया जाएगा, चाहे वह हिमाचल का हो या फिर दूसरे राज्य का।
परिवहन मंत्री सुबह 8:40 बजे घटनास्थल पर पहुंचे और करीब 12 मिनट तक घटनास्थल का दौरा किया। लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह सैंज में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि अब बसों में म्यूजिक सिस्टम लगाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में कार्रवाई के लिए आरटीओ को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, हादसे के तीन दिन बाद आने के सवाल पर मंत्री थोड़ा बिफर गए, लेकिन बाद में बोले उनका स्वास्थ्य खराब था, इसलिए नहीं आ पाया।