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SBI से 32 लाख की चोरी में बड़ा खुलासा

Fri, 31 Oct 2014 08:21 PM IST
Updated Fri, 31 Oct 2014 08:21 PM IST
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sbi theft: police reveal another fact.

हमीरपुर के नादौन में भारतीय स्टेट बैंक में 32 लाख रुपये की चोरी के मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मामले में डंप डाटा के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। इस मामले में पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज के अलावा दूसरा कोई साक्ष्य नहीं था।

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उसमें भी बस केवल तीन नाबालिग बच्चे ही दिख रहे थे। इसमें से एक बच्चा रुपयों से भरे बैग को लेकर फरार हो गया। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि बच्चे केवल पॉकेटमारी के इरादे से बैंक में दाखिल हो गए थे। उन्हें यह पता नहीं था कि बैग में इतना पैसा होगा।
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सीसीटीवी फुटेज में जो तीन नाबालिग बच्चे नजर आ रहे थे, वे अलग अलग परिवारों से थे। पैसा लेकर जब वे अपने परिवार के लोगों के पास पहुंचे तो यह पैसा इन तीन परिवारों के बीच बंटा। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन तीनों ने तीस लाख आपस में बांट लिए।
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ऐसे की थी चोरी

sbi theft: police reveal another fact.

अब तक पुलिस चोरी का 18 लाख बरामद कर चुकी है। इनमें एक आरोपी अभी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के पुलिस प्रयास कर रही है। मामले के जांच अफसर डीएसपी लाल मन शर्मा ने कहा कि आरोपी की तलाश चल रही है।

एसबीआई शाखा में तीन नाबालिग अंदर गए। तीनों ने जब देखा कि एक व्यक्ति ने बैग काउंटर पर रखा है तो उनमें से एक ने उस बैग को उठा लिया। उन्हें न तो यह पता था कि उक्त व्यक्ति बैंक का कैशियर है और न ही इस बात का अंदाजा था कि उसमें कितने रुपये हैं।

नादौन बस अड्डे से बच्चे परिवार के सदस्यों के साथ लगभग पौने एक बजे कांगड़ा चले गए फिर पठानकोट पहुंचे। यहां से ट्रेन लेकर अपने गांव पहुंचे।

ऐसे गिरफ्त में आए आरोपी

sbi theft: police reveal another fact.

जांच में पता चला कि आरोपी बच्चों के साथ परिजन शिवानंद नरगिस मीना समेत करीब छह लोग कांगड़ा पहुंचे थे। वे पांच दिन कांगड़ा रेलवे स्टेशन के पास रुके। इसके बाद वे नादौन पहुंचे। बैंक में चोरी कर भाग गए। आरोपी मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिला के कुरखेड़ी गांव निवासी हैं।

मोबाइल से आए पकड़ में

सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पुलिस को अंदेशा हो गया था कि चोरी के पीछे बाहरी राज्यों के लोगों का हाथ है इसलिए उस दिन साढ़े दस से साढ़े बारह बजे तक उस मोबाइल टावर लोकेशन में जितने भी दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबर एक्टिव थे, उनका डंप डाटा एकत्रित किया गया। उसके बाद यह सिम किनके नाम से जारी है, उनका पता खंगाला। इसी आधार पर इन आरोपियों तक पुलिस पहुंच पाई।

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