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जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी ने पंखे से लटककर दी जान

Sat, 04 Aug 2018 01:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Updated Sat, 04 Aug 2018 01:20 PM IST
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 prisoner committed suicide at model jail nahan himachal

आदर्श केंद्रीय कारागार नाहन में हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा भुगत रहे कैदी ने जेल की बैरक में फंदा लगाकर जान दे दी। दोस्त की हत्या के जुर्म में अर्जुन बहादुर वर्ष 2007 से सजा भुगत रहा था।

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शुक्रवार सुबह करीब सवा नौ बजे उसने चादर फाड़कर पंखे से फंदा लगा लिया। घटना सीसीटीवी में भी कैद हुई है। कैदी ने अपने हाथ पर दो नाम भी लिखे हैं। डीजीपी जेल सोमेश गोयल के नाहन दौरे से चंद घंटे पहले यह वारदात हुई। इससे जेल प्रशासन के हाथ पांव-फूल गए। 
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उधर, जेल में बने भवन का उद्घाटन करने आ रहे डीजीपी का कार्यक्रम आनन-फानन में रद्द करना पड़ा। पुलिस ने धारा 174 के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। 

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प्रशासन ने उसे लंगर कमांडर बनाया था

 prisoner committed suicide at model jail nahan himachal

जेल उप अधीक्षक विकास भटनागर ने बताया कि नेपाल मूल का अर्जुन मानसिक रूप से बीमार था और वह दवाइयां भी खाता था। जेल प्रशासन ने एक अगस्त से उसे लंगर कमांडर बनाया था।

सुबह जब सभी कैदी अपने-अपने कार्य को निकले तो वह तबीयत ठीक न होने की बात कहकर बैरक में रुक गया। सीसीटीवी कैमरे में उसे लंगर की बैरक के बाहर टहलते हुए देखा गया। सुबह 8:22 मिनट पर कैदी बैरक की ओर गया।

बैरक के अंदर से हाथ डालकर उसने कुंडी लगा ली। इसके बाद करीब सवा नौ बजे एक अन्य कैदी उस तरफ गया और उसे फंदे से लटका देख उसने तुरंत जेल प्रशासन को बताया। उसे नाहन मेडिकल कॉलेज लाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

एएसपी वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। सीजेएम नाहन ने मामले को लेकर जेल का दौरा भी किया।

फंदे पर झूलने से पहले हाथ पर लिखे दो साथी कैदियों के नाम

 prisoner committed suicide at model jail nahan himachal

आदर्श केंद्रीय कारागार नाहन की बैरक में सजायाफ्ता कैदी के फंदा लगाने से कई सवाल उठ रहे हैं। जेल महानिदेशक सोमेश गोयल एक भवन का उद्घाटन करने जेल आ रहे थे। जेल प्रशासन इसकी तैयारियों में जुटा था कि बैरक में उम्रकैद की सजा काट रहे अर्जुन बहादुर ने फंदा लगा लिया। उसने अपने हाथ में दो ऐसे लोगों के नाम लिखे हैं, जो उसके साथ जेल में कैदी थे। जेल में कैदी की आत्महत्या ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। 

अर्जुन बहादुर ने बैरक में फंदा लगाने से पहले हाथ में दो कैदियों के नाम लिखे थे। पुलिस के अनुसार कुछ अरसे पहले इन्हीं कैदियों के साथ उसकी मामूली कहासुनी हुई थी। वह कुछ अरसे से मानसिक रूप से परेशान था। इसकी बाकायदा दवाइयां भी ले रहा था। जेल में उसका चालचलन भी ठीक था। उसने टेलरिंग का कार्य भी किया। एक अगस्त से उसे एक महीने के लिए लंगर में लगाया गया। उसे लंगर कमांडर की जिम्मेदारी दी गई थी।

लंगर में कार्य करने के दो दिन बाद ही उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। हालांकि, पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का माना जा रहा है, लेकिन, आत्महत्या से पहले उसने दो नाम क्यों लिखे? इस पर पुलिस जांच कर रही है। नाहन जेल में लगभग 500 कैदी हैं। इनकी निगरानी के लिए 65 वार्डर और 17 होमगार्ड जवान तैनात हैं। 31 सीसीटीवी कैमरों के लिए दो स्क्रीन लगी हैं।

महज दो स्क्रीन के सहारे 31 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी जेल प्रशासन के लिए आसान नहीं है। जेल उप अधीक्षक विकास भटनागर ने बताया कि जेल में तमाम व्यवस्थाएं पुख्ता हैं। 31 सीसीटीवी कैमरे जेल परिसर में लगाए हैं। जिनकी निगरानी दो स्क्रीन पर की जाती है। एक स्क्रीन पर छोटे-छोटे टुकड़ों में पूरे परिसर की निगरानी करना भी आसान नहीं है। 

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