अल्ट्रासाउंड करते वक्त डॉक्टर ने की गर्भवती से अश्लील हरकतें
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आईजीएमसी के एक डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के दौरान गर्भवती से छेड़छाड़ की। महिला ने यह आरोप लगाए हैं। आरोप हैं कि डॉक्टर ने जान बूझकर उससे अश्लील हरकतें की। जानकारी महिला ने लिखित तौर पर ई- मेल के जरिये कॉलेज प्रिसिंपल और रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख को दी।
संगीन आरोप से कॉलेज प्रबंधन सकते में है। बुधवार को प्रिंसिपल ने मामले को लेकर बैठक बुलाई। शिकायतकर्ता महिला अपने पति के साथ प्रिंसिपल कार्यालय में आई और प्रबंधन से पूछा कि अब तक आप लोगों ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
उधर, डॉक्टर ने खुद पर लगे आरोपों को नकारा है। उसने प्रिंसिपल से कहा कि वह केवल स्वास्थ्य जांच कर रहा था, उस पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। मामला 13 अप्रैल का बताया जा रहा है। महिला गर्भवती है और उसे अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा गया था।
महिला ने पति को बताई आपबीती, डॉक्टर की शिकायत
तय समय पर वह अल्ट्रासाउंड करवाने पहुंची। महिला का आरोप है कि इस दौरान उसके साथ छेड़छाड़ हुई। पति को इस बारे में जानकारी दी। जिस पर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को इस बात की सूचना दी और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
काफी महिलाएं इस तरह की घटनाओं को लोक लाज से किसी को नहीं बताती। पुलिस प्रशासन की ओर से भी कई बार अपील की गई है कि महिलाएं अपने साथ होने वाले अपराधों के खिलाफ खुलकर सामने आए।
ताक पर नियम : बंद कमरे में महिला का अकेले अल्ट्रासाउंड
आईजीएमसी में नियमों को ताक पर रखकर अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। नियम यह है कि अगर कोई पुरुष डॉक्टर किसी महिला का अल्ट्रासाउंड कर रहा है तो स्वास्थ्य जांच महिला के एक पारिवारिक सदस्य की मौजदूगी में की जानी चाहिए। अगर महिला के साथ कोई नहीं है तो स्टाफ की ही किसी महिला के सामने जांच हो।
अमूमन ऐसा नहीं होता। परिजनों को अल्ट्रासाउंड सेंटर के बाहर ही रोक दिया जाता है। मजबूरी में महिला मरीज अकेले भीतर जाती है। अगर उस दिन भी शिकायतकर्ता महिला के साथ उनके किसी परिजन को भेज दिया जाता तो यह नौबत ही नहीं आती। इस व्यवस्था को लागू करने में प्रबंधन नाकाम रहा है।
आरोपी डॉक्टर ने कहा, मुझे कोई बात नहीं करनी
आरोपी डॉक्टर से जब अमर उजाला ने इस बारे में उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने इस बारे में कोई भी बात करने से साफ इनकार कर दिया।
आरोप गंभीर, जांच होगी
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर केपी चौधरी ने कहा कि मामला ध्यान में आने के बाद दोनों पक्षों से बातचीत की गई। आगामी जांच संयुक्त निदेशक आईजीएमसी को सौंप दी है, जो एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट तैयार करेगी।
उन्होंने निर्देश दिए हैं कि महिला मरीजों की स्वास्थ्य जांच उनके परिवार के किसी एक सदस्य की मौजूदगी में हो। यह व्यवस्था पहले से ही लागू है और स्वास्थ्य जांच के दौरान अधिकांश डॉक्टर इसकी अनुपालना भी करते हैं। आरोप गंभीर है, रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।