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Una News: 100 करोड़ के साइबर घोटाले में ईडी की कार्रवाई, रोपड़ में मुख्य आरोपी के घर पर छापा

Sat, 22 Aug 2026 01:38 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sat, 22 Aug 2026 01:38 AM IST
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ED takes action in 100 crore cyber scam; raids main accused's house in Ropar.
नंगल (ऊना)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने शुक्रवार को रोपड़ जिले के नंगल शहर में कथित ₹100 करोड़ के साइबर धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी विजय राज कपूरिया के घर पर छापेमारी की। यह मामला एक कथित कॉल सेंटर से जुड़ा है, जिसके जरिए विदेशों में रहने वाले लोगों को फर्जी कॉल के माध्यम से ठगने का आरोप है।
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ईडी की टीमें दोपहर के समय कपूरिया के घर पहुंचीं। आरोपी का परिवार पहले ही शहर छोड़ चुका है, इसलिए टीम ने घर में रह रहे किरायेदारों से पूछताछ की। मौके पर मौजूद मीडिया से ईडी अधिकारियों ने बातचीत करने से इनकार कर दिया।
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मूल पुलिस मामला 10 जनवरी 2024 को मोहाली पुलिस द्वारा कपूरिया, संकेत, सोनू, रजत कपूर और निखिल कपिल के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 120-बी तथा आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत दर्ज किया गया था।
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कपूरिया इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक है। पुलिस ने 9 जनवरी 2024 को सेक्टर-108 स्थित एक रिहायशी परिसर में कथित रूप से चल रहे कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया था। पुलिस का आरोप था कि कॉल सेंटर बिना अनुमति के चलाया जा रहा था और फर्जी कॉल के जरिए विदेशों में लोगों से धोखाधड़ी की जा रही थी।
ईडी की यह कार्रवाई मामले की जांच को लेकर चल रहे कानूनी और पुलिस विवाद के बीच हुई है। मामले के दो अन्य आरोपियों सोनू और रजत कपूर ने जिला अदालत में डिस्चार्ज एप्लीकेशन दायर करते हुए दावा किया था कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और वे कंपनी में केवल कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे थे।
आरोपियों ने दावा किया कि किसी ऐसे पीड़ित की पहचान नहीं हुई है, जिसे ठगा गया हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ किसी गलत तरीके से लाभ प्राप्त करने या किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं है।
मामले ने उस समय नया मोड़ लिया था, जब तत्कालीन जिला साइबर सेल प्रभारी इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को पत्र लिखकर जांच को स्टेट साइबर सेल में ट्रांसफर करने की मांग की थी।
महिला इंस्पेक्टर ने जांच में कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि पुलिस और राजनीतिक गठजोड़ के जरिए आरोपियों को फायदा पहुंचाने और उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने खुद को कथित घोटाले में व्हिसलब्लोअर बताते हुए स्थानीय और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
इसके बाद डीजीपी ने एडीजीपी वी. नीरजा की अध्यक्षता में एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था। इसमें आईजीपी धनप्रीत कौर और मोहाली के एसएसपी दीपक पारेख को सदस्य बनाया गया था।
अप्रैल 2024 में जिला अदालत ने पालक देव की ओर से सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत दायर याचिका पर इंस्पेक्टर अमनजोत कौर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। याचिका में उन पर ₹25 लाख रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी और मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को निर्धारित है।

जिला साइबर सेल से तबादला की गई इंस्पेक्टर अमनजोत कौर का कहना था कि कथित कॉल सेंटर रिहायशी परिसर से बिना आवश्यक अनुमति के चलाया जा रहा था और कई वर्षों से विदेशों में रहने वाले लोगों के साथ कथित धोखाधड़ी की जा रही थी।
ईडी की ताजा कार्रवाई के बाद मामले में कथित वित्तीय लेन-देन और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े व्यापक नेटवर्क पर फिर से ध्यान केंद्रित होने की संभावना है।
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