पूर्व डीजीपी पर चलेगा केस, सरकार ने दी मंजूरी
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बहुचर्चित फोन टैपिंग मामले में हिमाचल सरकार ने पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी के खिलाफ मुकदमा चलाने को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद गृह विभाग ने फाइल विधि विभाग को अंतिम स्क्रूटनी के लिए भेज दी है।
गृह विभाग कानूनी राय लेने के बाद सप्ताह के भीतर विजिलेंस को इस मामले में चालान पेश करने की अनुमति देगा। फोन टैपिंग मामले में विजिलेंस ने पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी को मुख्य आरोपी बनाया है।
इस मामले की चार्जशीट में कुछ अफसरों और कर्मचारियों के नाम भी शामिल हो सकते हैं।
विजिलेंस ने सरकार को भेजी थी फाइल
करीब डेढ़ महीने पहले विजिलेंस ने फोन टैपिंग केस की जांच पूरी कर फाइल अभियोजन मंजूरी के लिए सरकार को भेजी थी। विजिलेंस के तत्कालीन आईजी आनंद प्रताप सिंह ने मीडिया को बताया था कि सिर्फ दो-चार फोन ही अवैध रूप से टैप हुए पाए गए हैं।
जांच में 6 महीने से पुरानी रिकॉर्ड की गई क्लीपिंग्स मिली थीं, जोकि अवैध फोन टैप करने जैसा ही अपराध है। विजिलेंस ने भंडारी को छह महीने से पुराना रिकॉर्ड रखने पर आरोपी बनाया है। इस मामले में 26 जून 2013 को एफआईआर दर्ज की गई थी।
क्या है फोन टैपिंग मामला
कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए धूमल सरकार पर नेताओं के अवैध रूप से फोन टैप करने के आरोप लगाए थे। दिसंबर 2012 के अंत में कांग्रेस के सत्ता में आते ही सीआईडी और विजिलेंस से रातों-रात फोन टैपिंग से संबंधित सारा रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया था।
उधर, पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी का कहना है कि सरकार डेढ़ साल से इस मामले की जांच करवा रही थी लेकिन जांच में कुछ नहीं निकला। यह सरकार की खुद को सही साबित करने की नाकाम कोशिश है। मैं जल्द ही मीडिया के सामने कई खुलासे करूंगा।