टेक्नोमैक घोटालाः ईडी ने सीआईडी और बैंक से मांगे दस्तावेज
प्रदेश के बहुचर्चित इंडियन टेक्नोमैक घोटाले में कथित मनी लांड्रिंग की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब अपनी जांच को रफ्तार दे दी है। जांच एजेंसी ने हिमाचल पुलिस से अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों के अलावा बैंकों से लोन संबंधी जानकारी मांगी है।
इससे पहले ईडी ने हिमाचल पुलिस से एफआईआर की कॉपी मांगी थी जिसके आधार पर उसने अब अपनी प्रारंभिक जांच शुरू की है। सूत्रों की मानें तो कंपनी ने एक दर्जन से अधिक बैंकों से 2250 करोड़ के करीब कर्ज लिया लेकिन उसे फैक्टरी के लिए उपयोग में लाने के बजाय अन्य जगह निवेश किया।
ईडी इसी बात की जांच कर रही है कि इस पैसे का विदेश में निवेश किया गया है। दरअसल, अब तक की सीआईडी जांच में यह बात सामने आई है कि करोड़ों का घोटाला करने वाली कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने कई बेनामी संपत्तियां बनाईं व देश-विदेश की कंपनियों में निवेश किया।
कंपनी ने यह बैंक लोन अपनी फैक्ट्रियों में फर्जी उत्पादन व फर्जी दस्तावेज के जरिये हासिल किया था। साथ ही भारी भरकम टैक्स चोरी भी की थी। जिसके बाद सीआईडी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
सीआईडी ने मामले की जांच में अभी तक कंपनी के एक निदेशक को गिरफ्तार किया है। एक घोटाले में सीआईडी ने जांच पूरी कर अदालत में चलान पेश कर दिया है। इसमें कंपनी के तत्कालीन डीजीएम (अकाउंट) विवेक गुप्ता को आरोपी बनाया गया है।