अश्लील फिल्म की शिकायत करने पर पीटा छात्र
हिमाचल के जिला कुल्लू के एक कॉन्वेंट स्कूल में सातवीं कक्षा के बच्चों को अश्लील फिल्म दिखाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस के अनुसार छात्रों का कहना था कि उन्हें क्लास टीचर ने अश्लील फिल्म दिखाई थी।
बुधवार को बच्चों और परिजनों को संयुक्त रूप से ये फिल्म फिर दिखाई गई लेकिन बच्चों ने आरोप लगाया कि फिल्म के साथ छेड़छाड़ की गई है। इससे स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। वहीं, बौखलाए स्कूल के एक कर्मचारी ने एक बच्चे की पिटाई तक कर डाली।
बच्चा बीमार था और वह पानी मांग रहा था। इसी पर कर्मचारी ने उसे पीट डाला। बच्चे के नाना बाद में उसे अस्पताल लेकर गए।
अभिभावकों ने पीटे कर्मचारी
इस पर गुस्साए परिजनों और स्कूल कर्मचारियों में जमकर हाथापाई हो गई, लेकिन पुलिस ने बचाव करते हुए किसी तरह परिजनों को शांत करवाया। सातवीं कक्षा के बच्चों को अश्लील फिल्म दिखाने के मामले को लेकर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की मंगलवार देर शाम तक हंगामेदार बैठक चली रही।
इसमें बुधवार को बच्चों और अभिभावकों को एक साथ फिल्म दिखाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन, बुधवार को दिखाई गई फिल्म देखने के बाद बच्चों ने साफ कर दिया कि उन्हें वह फिल्म नहीं दिखाई गई थी। जो फिल्म दिखाई गई थी, वह अश्लील थी।
जिस छात्र की पिटाई की गई, उसके नाना देश राज अवस्थी का कहना है कि छात्र बीमार रहता है। उन्होंने कहा कि पहले तो स्कूल प्रबंधन ने उन्हें अंदर नहीं आने दिया और बाद में उनके नाति की पिटाई कर डाली।
वीडियो से छेड़छाड़ का आरोप
अभिभावकों भुवनेश्वर गौतम, विशाल सहित अन्य का कहना है कि बच्चों ने कहा है कि फिल्म के साथ छेड़छाड़ की गई है। उधर, बाल अधिकार संरक्षण आयोग कुल्लू के जिला अध्यक्ष अभिषेक रॉय का कहना है कि स्कूल में जो घटना हुई है, वह गलत है। जैसे ही अभिभावक इस बारे में शिकायत करेंगे आयोग भी इसकी जांच करेगा।
उधर, स्कूल और अभिभावकों की बनाई गई संयुक्त जांच कमेटी के अध्यक्ष मोहन बाली का कहना है कि मामला बहुत संवेदनशील है। कमेटी मामले की गंभीरता से जांच करेगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। स्कूल के कार्यकारिणी प्रधानाचार्य फॉदर मैथ्यू ने कहा की कमेटी जांच करेगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों को बंद रखा ताले में
स्कूल प्रबंधन ने मीडिया कर्मियों को अंदर आने पर रोक लगा रखी थी। कोई बच्चा मीडिया से बात न करे, इसके लिए उन्हें ताले में बंद कर रखा गया था। स्कूल प्रबंधन को पहले ही हंगामे का अनुमान था। इसके चलते उन्होंने पहले ही सुरक्षा के लिए सात आठ पुलिस कर्मी मौके पर बुला रखे थे।