डीलर से धोखाधड़ी के आरोप में फंसे हिमाचली सांसद
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हरियाणा के एक प्रॉपर्टी डीलर ने सांसद, उसके दामाद और बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। इस सिलसिले में शिमला पुलिस के पास प्रॉपर्टी डीलर ने लिखित में शिकायत की है। प्रापर्टी डीलर राय सिंह का आरोप है कि सांसद ने उसे शिमला में सस्ते दाम पर प्रापर्टी खरीदने का प्रस्ताव दिया।
सांसद के एक पारिवारिक मित्र की वजह से उसकी मुलाकात दिल्ली में उनके सरकारी आवास पर हुई थी। मुलाकात में उन्होंने बताया कि यह संपत्ति बैंककरप्ट होने वाली है। अगर ऐसा हुआ तो उनकी पारिवारिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचेगी। लिहाजा उसे वह बेच रहे हैं। पूरी बिल्डिंग का सौदा एक करोड़ अस्सी लाख में होने के बाद भुगतान भी कर दिया गया।
आज तक नहीं हुई रजिस्ट्री
इसके बाद आज तक इसकी रजिस्ट्री नहीं हुई। हालांकि प्रापर्टी डीलर ने स्वीकार किया कि उसे सांसद ने किस्तों में तीस लाख रुपये वापस भी किए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 15 नवंबर 2010 को उसने टोकन मनी के तौर पर तीस लाख दे दिए।
बाकी भुगतान उसने किस्तों में 31 जून 2011 तक कर दिया था। इसके बाद जब रजिस्ट्री करने के लिए कहा गया तो उन्होंने टाल मटोल करना शुरू कर दिया। शक होने पर प्रापर्टी के पेपर निकाले गए तो इसके तीन हिस्सेदार निकले।
यह देख कर उसकी पांव तले जमीन खिसक गई। इस बारे में जब सांसद से बात की गई तो उन्होंने उसे भरोसा दिलाया कि उसका पैसा ब्याज समेत लौटा देंगे। लेकिन काफी वक्त तक टालमटोल के बाद उसका फोन उठाना भी बंद कर दिया।
सासंद की सफाई केस से कोई लेना देना नहीं
राय सिंह की शिकायत के मुताबिक जब उसने पुलिस में मामला दर्ज करवाने की बात कही तो उसे किस्तों में दस - दस लाख वापस दिए गए। अब तक उन्होंने सिर्फ तीस लाख लौटाए हैं। 17 अक्तूबर को उसे शिमला यह कहकर बुलाया गया कि अपना बकाया पैसा लेने आ जाए। जब यहां आया तो उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।
लेकिन पुलिस के सामने अपना पक्ष रखने के बाद उसे छोड़ दिया गया। राय सिंह का कहना है कि उसने अपने पैसा लौटा देने के लिए कई बार इन लोगों से बातचीत की है। सबूत के तौर पर इनकी बातों को रिकार्ड भी किया है। शिकायतकर्ता ने प्रापर्टी के सौदे को लेकर तैयार किए गए दो शपथ पत्र और आडियो सीडी मीडिया को जारी कर दी।
दो शपथ पत्र में 80 लाख और 50 लाख लेने की बात स्वीकार की गई है। लेकिन इसमें कहीं भी सांसद के नाम का जिक्र नहीं है। यह राशि इनके दामाद के नाम से ली गई है ऐसा दावा शिकायतकर्ता की ओर से किया गया है। इस आरोप पर अमर उजाला ने सांसद का भी पक्ष जानना चाहा। उनका साफ कहना है कि उन्होंने किसी से कोई पैसा नहीं लिया है। उन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार है। कौन है यह व्यक्ति उन्हें नहीं पता।