हे भगवान! एचआईवी नेगेटिव को बना डाला पॉजिटिव
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एचआईवी नेगेटिव लड़के को पॉजिटिव बताने वाली टांडा की निजी लैब पर कई सवाल उठने लगे हैं। इस लैब ने नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (एनएसीओ) भारत सरकार की गाइड लाइंस भी ताक पर रख दीं।
नाको की गाइडलाइंस के पेज नंबर 117 से 120 को देखें तो पता चलता है कि टांडा की निजी लैब ने एचआईवी टेस्ट के दौरान गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है। इसमें लिखा है कि एचआईवी टेस्ट करने के लिए लेबोरेटरी नाको के कंट्रोल में होनी चाहिए।
मरीज का टेस्ट करने से पहले उसकी काउंसिलिंग जरूरी है। उसके बाद जब मरीज राजी हो तभी उसका एचआईवी टेस्ट होगा। एचआईवी टेस्ट तीन चरणों में होगा। तीनों चरणों में पॉजिटिव आने पर ही मरीज को एचआईवी पॉजिटिव गिना जाएगा। यह सारा उपचार देश भर में मुफ्त होगा।
डाक्टरों ने भी मरीज का नाम उजागर कर दिया
हैरत यह है कि नूरपुर अस्पताल से टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर हुए एक नाबालिग को परिवार सहित निजी लैब की गलती की वजह से बेहद मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मरीज दो अप्रैल को नूरपुर अस्पताल से टांडा रेफर किया गया था।
पांच अप्रैल को नाबालिग के मेडिकल टेस्ट किए गए। निजी लैब में मरीज का एचआईवी टेस्ट भी किया गया। लैब ने टेस्ट की रिपोर्ट अलग से तो नहीं दी, लेकिन कंबाइंड ब्लड रिपोर्ट पर ही मरीज को एचआईवी पॉजिटिव करार दे दिया।
इसके साथ लिखा कि हैंडल केयरफुली। लैब ने मरीज की पहचान भी उजागर कर दी और टेस्ट के 450 रुपये भी ले लिए। और तो और टांडा के डाक्टरों ने भी इस रिपोर्ट के बाद मरीज की उपचार पर्ची पर हाईलाइट कर लाल शब्दों में इम्यूनो कंप्रोमाइज लिख दिया। साथ ही ऊपर मरीज का नाम और उम्र भी लिख दी।
नेगेटिव आई रिपोर्ट
वहीं, मेडिकल कॉलेज में जब 10 अप्रैल को मरीज का एचआईवी टेस्ट किया तो उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। ऐसे में मरीज और उसके परिवार को मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा। नाबालिग किशोर अभी भी टांडा में उपचाराधीन है। कुछ साल पहले भी इस तरह का मामला टांडा में एक निजी लैब में हुआ था। इसमें बच्चे की मौत हो गई थी।
शिशु रोग विभाग के एचओडी डाक्टर संजीव चौधरी का कहना है कि मरीज किशोर को क्रोनिकल रोग है। इसलिए उसका एचआईवी टेस्ट करवाने के लिए लिखा था।
निदेशक स्वास्थ्य डाक्टर कुलतार डोगरा का कहना है कि यह बेहद संगीन मामला है। टांडा में निजी लैब की जांच करवाएंगे। इस मामले में निष्पक्ष जांच करवाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निजी लैब एचआईवी टेस्ट नहीं कर सकती
जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डाक्टर सुरेंद्र निखिल गुप्ता का कहना है कि नाको की गाइडलाइंस के तहत कोई भी निजी लैब एचआईवी टेस्ट नहीं कर सकती है। यह टेस्ट भारत सरकार के आईसीटीसी की लैब में ही होता है और वह भी मुफ्त। एचआईवी टेस्ट से पहले मरीज की काउंसिलिंग की जाती है। उसके बाद मरीज की सहमति के बाद ही टेस्ट किया जाता है। मरीज की पहचान गुप्त रखी जाती है।
सरकार करे सख्त कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश एड्स कंट्रोल अनुबंध कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष विनोद शर्मा कहते हैं कि अगर निजी लैब प्रबंधन एचआईवी टेस्ट के पैसे ले रहा है तो यह सरकारी आदेशों का उल्लंघन है। देश भर में यह टेस्ट मुफ्त होता है। सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई करे।