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पढ़िए, बिलासपुर बस हादसे के 5 बड़े कारण

Thu, 25 Sep 2014 10:27 AM IST
Updated Thu, 25 Sep 2014 10:27 AM IST
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bilaspur bus accident: exculsive story

बिलासपुर के राहियां बस हादसे के चश्मदीदों ने बताया कि कैसे ये बड़ा हादसा हो गया? हादसे के एक नहीं कई कारण थे। घायलों ने ‘अमर उजाला’ से बात की। एक घायल ने बताया कि हादसे की एक दो नहीं बल्कि कई वजहें हैं।

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23 सीटर बस में 50 यात्रियों को ठूंस दिया। ओवरलोडिंग इस हादसे की पहली और सबसे बड़ी वजह रही। घायल देवराज ने बताया कि छत पर भी सवारियां चढ़ाई गई थी। राजीव ने कहा कि वह भी स्वयं छत पर था। छलांग लगाकर जान बचाई।
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23 सीटर बस में 50 से अधिक सवारियां भरी हुई थीं। यहां तक कि छत पर भी सवारियां चढ़ाई गई थी। ऐसे में सीधे तौर पर यह मामला लापरवाही का लगता है। उधर, डीसी बिलासपुर डॉ. अजय शर्मा ने बस हादसे के मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस घटना की न्यायिक जांच भी कराई जाएगी।

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खस्ताहाल सड़क भी बनी वजह

bilaspur bus accident: exculsive story

इस सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हैं। बस को गड्ढों से बचाने के चक्कर में गाड़ी का कोई पुर्जा टूट गया और बस गोबिंदसागर झील में समा गई। इसके अलावा स्पॉट पर पैरापिट भी नहीं था।

वहीं, हादसे का एक कारण तेज रफ्तार भी बताया जा रहा है। दुर्घटनाग्रस्त बस के पीछे एक और बस आ रही थी। इससे आगे रहने के चक्कर में हादसा हो गया। बस हादसे में घायल हुए ऋषिकेश के देवराज, देवानंद, कल्लर के राजीव कुमार, दुर्गा ने बताया कि बस में काफी अधिक सवारियां थी।

50 से अधिक सवारियां होने के कारण अचानक बस का कोई पुर्जा टूटने की आवाज आई। उसके बाद उन्हें याद नहीं।

सात महीने में 610 लोगों ने गवांई जान

bilaspur bus accident: exculsive story

हिमाचल प्रदेश की सड़कें स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए काल बन रही है। सैकड़ों लोगों असमय काल के गाल में समा रहे हैं। पिछले सात माह में प्रदेश की सड़क हादसों ने 610 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है।

इस अवधि के दौरान 1421 वाहन दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 2600 से अधिक लोग घायल हुए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 16 जनवरी से 24 सितंबर 2014 के बीच 1421 वाहन दुर्घटनाएं हुई। इसमें 5610 लोग असमय काल के गाल में समा गए। जबकि, 2600 से अधिक लोग घायल हुए।

इस अवधि के दौरान पथ परिवहन निगम की 32 बसें और 71 निजी बसें दुर्घटनाग्रस्त हुई। सड़क दुर्घटनाओं में शिमला जिले में सबसे अधिक 89 मौत है। इसके बाद सिरमौर में 88, मंडी में 63, सोलन में 60, कांगड़ा में 58, ऊना में 47 लोगों की मृत्यु हुई। इसके अलावा बिलासपुर में 37, चंबा में 30, हमीरपुर में 13, किन्नौर में 22, कुल्लू में 26, बद्दी में 28 की सड़क दुर्घटना में मौत हुई।

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