नशीले कैप्सूलों की तस्करी का ऐसा तरीका, पढ़कर चौंक जाएंगे
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पुलिस ने नशीली दवाओं का अवैध धंधा चला रहे तीन लोगों को 3250 नशीले कैप्सूल के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। औद्योगिक शहर बद्दी में नशीली दवाओं का अवैध धंधा चला रहे तीन लोगों को पुलिस ने मंगलवार मध्यरात्रि छापामारी करते हुए 3250 नशीले कैप्सूल के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह खेप एक किराना दुकान के मालिक को पैकेट में दी जा रही थी।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुंझाल गांव के समीप फार्मा कंपनी वॉकहार्ट से नशीली दवाओं की चोरी कर इसे बीबीएन के बाजार में नशेड़ियों को बेचा जा रहा है। सूचना के आधार पर डीएसपी बद्दी गौरव सिंह ने एक विशेष टीम बनाकर मंगलवार रात्रि इस क्षेत्र की रैकी की। इस दौरान नशीली दवाओं को सप्लाई करने वाले आरोपी कंपनी कर्मचारी अरविंद उर्फ फिर्की ने कंपनी के बाहर से एक पैकेट
लेकर करीब एक सौ मीटर की दूरी पर किराना शॉप मालिक नरेश कुमार को दिया। इसके बाद वह भागता हुआ कंपनी में ड्यूटी के लिए चला गया। इसके बाद पुलिस ने दुकान पर छापामारी करते हुए नशीली दवा को बरामद किया। इसी दौरान पूछताछ में आरोपी नरेश ने दूसरे आरोपी कंपनी कर्मचारी संदीप कुमार के नाम का खुलासा किया।
इसलिए कंपनी के भीतर शक की सुई
पुलिस ने संदीप के किराए के कमरे में छापामारी कर वहां से भी नशीली दवा के 1650 कैप्सूल बरामद किए हैं। डीएसपी गौरव सिंह ने बताया कि आरोपियों के वॉकहार्ट कंपनी कनेक्शन को लेकर जांच की जा रही है। पुलिस थाना बरोटीवाला के अधीन ड्रग्स एंड
कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एसपी बशेर सिंह ने इसकी पुष्टि की है। वहीं इस मामले में ड्रग्स विभाग ने भी पड़ताल शुरू कर दी है। उधर, ड्रंग कंट्रोलर नवनीत मरवाह ने कहा कि इस संबंध में संबंधित इंस्पेक्टर को जांच के आदेश दे दिए हैं।
स्पेसमो प्रॉक्सिवान एनएआर एक्स में आती है। यह दवा बाजार में खुले में नहीं बिक सकती। सरकार ही इस साल्ट को मेन्युफेक्चरर को मुहैया करवाती है। मेन्युफेक्चरर को इसका पूरा रिकार्ड मेनटेन करके रखना पड़ता है। एक एक मिलीग्राम का हिसाब देना पड़ता है। यह साल्ट लाक की में रखा जाता है। बिना डाक्टर की पर्ची के किसी को भी यह नहीं दिया जा सकता। बेचने वाले को भी इसका पूरा रिकार्ड मेनेटेन करके रखना पड़ता है।
इस दवा में ड्रामा डोल ड्रग्स और डेक्स्ट्रो प्रोफोक्सिफिन नामक नारकोनिक के मिश्रण का प्रयोग किया जाता है। पकड़े गए दो आरोपी कर्मचारी कंपनी के प्रोडक्शन यूनिट में काम करते थे। जहां से दोनों दवा के इन कैप्सूलों को बाहर सप्लाई कर रहे थे। लिहाजा प्रतिबंधित दवा को इस तरह से बाजार में सप्लाई किया जाना कंपनी की कार्यशैली पर भी सवाल उठा रहा है।
पूरी कीमत पर बिक रही थी दवा
चोरी के इस नशीले कैप्सूल को आरोपियों की ओर से केमिस्ट शॉप में उपलब्ध दवा के बराबर दामों में बेचा जा रहा था। केमिस्ट शॉप में एक कैप्सूल की कीमत 20 रुपये है। पेनकिलर के रूप में दवा का प्रयोग होता है। यह नशा काफी घातक है।
कंपनी कर रही मामले की जांच
कुंजाहल स्थित वॉकहार्ट कंपनी के एचआर हेड पुनीत गुप्ता ने कहा कि इस संदर्भ में वह कुछ भी टिप्पणी नहीं कर सकते। लेकिन सुरक्षा के मानक पूरे हैं। वहीं प्लांट हेड अजस कुमारिया ने कहा कि इस संदर्भ में कंपनी जांच कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर यह दवाएं कंपनी से बाहर कैसे निकल रही हैं। इस पर कार्रवाई की जाएगी।