कोलबांध से सटी पहाड़ी दरकी, चार गांव खाली करने के आदेश
कोलबांध परियोजना से बनी झील से सटी पहाड़ी दरकने से चार गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। बिलासपुर से लगती मंडी जिले की सीमा पर धन्यारा पंचायत के कांडी, स्वाड़, रोपड़ू और मैंदला गांव को जिला प्रशासन ने एहतियातन खाली करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
एसडीएम सुंदरनगर ने ग्रामीणों को सरकारी स्कूल नेरी में शरण लेने को कहा है। खौफ में कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के यहां रहने के लिए चले गए हैं। जो परिवार खेतीबाड़ी पर ही निर्भर हैं वे अभी गांव में ही डटे हुए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन न तो रहने-खाने की उचित व्यवस्था की गई और न ही मुआवजे के बारे में कुछ बताया। बिलासपुर, मंडी और सोलन की सीमा पर कोलबांध परियोजना बनने से हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
कई किलोमीटर का क्षेत्र बांध बनने से डूब गया है। तत्तापानी में गर्म पानी के चश्मे भी इसकी जद्द में आए हैं। धन्यारा पंचायत के चार गांव पहाड़ी पर होने के चलते विस्थापित होने से बच गए, लेकिन झील के पानी से पहाड़ी में दरारें आने और दरकने से अब खतरा बढ़ गया है।
चार गांवों में रहते हैं 25 परिवार
चार गांवों में 25 परिवार रहते हैं। इनकी कुल आबादी 150 से ज्यादा है। पांच परिवारों के 30 से 40 सदस्य अभी भी गांवों में डटे हुए हैं। स्थानीय निवासी तुला राम, खेम सिंह, कृपा राम, जोघलराम, किक्कू राम, जुध्या देवी का कहना है कि उन्हें प्रशासन का नोटिस मिला है, लेकिन वे खेतीबाड़ी छोड़कर कहां जाएंगे।
उन्हें कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिली है। एनटीपीसी व प्रशासन की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला। ज्यादातर प्रभावित समोल-1, समोल-2, कुफरी, बडेच्छ और नेरी गांव में रहने को विवश हैं।
एसडीएम सुंदरनगर राहुल चौहान ने कहा कि मामला उनके ध्यान में है। नोटिस भेजे गए हैं, अगर कोई समस्या है तो उसका समाधान किया जाएगा। उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर का कहना है कि ग्रामीणों के रहने की उचित व्यवस्था की जाएगी।
पहाड़ी से गिरते रहते हैं पत्थर
खेम सिंह का कहना है कि पहाड़ी से अकसर पत्थर गिरते रहते हैं। हर समय हादसे का डर रहता है। नोटिस देना ही समाधान नहीं है। अगर खेतीबाड़ी छोड़ दी तो खाने के लाले पड़ जाएंगे।
अमर उजाला ने किया था सचेत
17 अक्तूबर 2016 को अमर उजाला ने स्थानीय लोगों का मुद्दा उठाया था। प्रशासन और एनटीपीसी ने इस पर कोई सुनवाई नहीं थी। गांव के लोग अभी भी कंद्राओं में रहने को मजबूर हैं।
मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। प्रशासन ने ऐसी कोई समस्या मेरे सामने नहीं रखी। अधिकारियों से पता कर जरूरी निर्देश देंगे, ताकि लोग परेशान न हों।-अनिल शर्मा, ऊर्जा मंत्री