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Shimla News: मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ माकपा का धरना
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केंद्र पर योजना खत्म करने का आरोप
अब ब्लॉक और जिला मुख्यालयों में होंगे प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (माकपा) की राज्य कमेटी ने शुक्रवार को रिज मैदान पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मनरेगा का नाम बदलने के विरोध स्वरूप धरना दिया। माकपा अब पांच फरवरी तक जिला और ब्लॉक मुख्यालयों में प्रदर्शनों करेगी।
रिज पर हुए इस धरने के दौरान कार्यकर्ताओं और नेताओं ने देश की एकता, धर्मनिरपेक्षता, संप्रभुता, संघवाद, आपसी भाईचारे और संविधान की रक्षा करने की शपथ ली। इसके बाद माकपा कार्यकर्ताओं ने रिज मैदान से स्कैंडल प्वाइंट, शेर ए पंजाब होते हुए मोमबत्ती जुलूस निकाला और उपायुक्त कार्यालय के बाहर समाप्त किया। धरने पर बैठे माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान, जिला सचिव विजेंद्र मेहरा लोकल कमेटी सचिव जगत राम ने कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने मनरेगा कानून पर बड़ा हमला किया है। अधिकार आधारित कानून को एक बजट आधारित योजना में बदला है। यह गरीब किसानों, ग्रामीण मजदूरों और कृषि मजदूरों के आर्थिक अधिकारों पर हमला है। देश में चल रहे कृषि संकट को और बढ़ाने का काम किया है।
माकपा नेताओं ने कहा कि मनरेगा कानून के खिलाफ देश के कॉरपोरेट, ग्रामीण भू-स्वामी और धनी लोग शुरू से ही थे, यह कानून मांग के आधार पर रोजगार देता था। 15 दिन के अंदर रोजगार न मिलने पर आवेदक रोजगार भत्ते का हकदार बनता था। मनरेगा में वैकल्पिक 100 दिन के रोजगार के चलते यह शोषण कम हुआ था। केंद्र सरकार 2014 से ही इस कानून की विरोधी रही है। केंद्र ने मनरेगा के बजट में कटौती, वेतन भुगतान में देरी और प्रशासनिक बाधाएं पैदा की हैं। केंद्र सरकार इस कानून को समाप्त करना चाहती है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को 90 :10 अनुपात पर खर्च करना पड़ेगा। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
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अब ब्लॉक और जिला मुख्यालयों में होंगे प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (माकपा) की राज्य कमेटी ने शुक्रवार को रिज मैदान पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मनरेगा का नाम बदलने के विरोध स्वरूप धरना दिया। माकपा अब पांच फरवरी तक जिला और ब्लॉक मुख्यालयों में प्रदर्शनों करेगी।
रिज पर हुए इस धरने के दौरान कार्यकर्ताओं और नेताओं ने देश की एकता, धर्मनिरपेक्षता, संप्रभुता, संघवाद, आपसी भाईचारे और संविधान की रक्षा करने की शपथ ली। इसके बाद माकपा कार्यकर्ताओं ने रिज मैदान से स्कैंडल प्वाइंट, शेर ए पंजाब होते हुए मोमबत्ती जुलूस निकाला और उपायुक्त कार्यालय के बाहर समाप्त किया। धरने पर बैठे माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान, जिला सचिव विजेंद्र मेहरा लोकल कमेटी सचिव जगत राम ने कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने मनरेगा कानून पर बड़ा हमला किया है। अधिकार आधारित कानून को एक बजट आधारित योजना में बदला है। यह गरीब किसानों, ग्रामीण मजदूरों और कृषि मजदूरों के आर्थिक अधिकारों पर हमला है। देश में चल रहे कृषि संकट को और बढ़ाने का काम किया है।
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माकपा नेताओं ने कहा कि मनरेगा कानून के खिलाफ देश के कॉरपोरेट, ग्रामीण भू-स्वामी और धनी लोग शुरू से ही थे, यह कानून मांग के आधार पर रोजगार देता था। 15 दिन के अंदर रोजगार न मिलने पर आवेदक रोजगार भत्ते का हकदार बनता था। मनरेगा में वैकल्पिक 100 दिन के रोजगार के चलते यह शोषण कम हुआ था। केंद्र सरकार 2014 से ही इस कानून की विरोधी रही है। केंद्र ने मनरेगा के बजट में कटौती, वेतन भुगतान में देरी और प्रशासनिक बाधाएं पैदा की हैं। केंद्र सरकार इस कानून को समाप्त करना चाहती है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को 90 :10 अनुपात पर खर्च करना पड़ेगा। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
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