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Shimla News: मृतक को नियमित ड्राइविंग लाइसेंस जारी न करना प्रशासनिक चूक, मुआवजा देने के आदेश

Sun, 05 Jan 2025 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2025 11:55 PM IST
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court decisioncourt decision
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सोलन जिला आयोग के फैसले को रखा बरकरार
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बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता को 2.46 लाख रुपये देने के आदेश
2017 में शिकायतकर्ता ने वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने पर मुआवजे का किया था दावा
न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने दावे को किया था खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी

शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने करीब आठ साल पुराने सड़क दुर्घटना के एक मामले में सोलन उपभोक्ता आयोग के फैसले को बरकरार रखा है। राज्य आयोग ने माना कि मृतक हर्ष शर्मा (शिकायतकर्ता का पुत्र) दुर्घटना के समय वाहन चलाने के लिए पात्र था तथा पॉलिसी की शर्तों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। साथ ही आयोग ने टिप्पणी की कि हादसे से पहले मृतक को नियमित ड्राइविंग लाइसेंस जारी न करना एक प्रशासनिक चूक है। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने 6 सितंबर 2023 को जिला आयोग के पारित आदेश के विरुद्ध अपील दायर की थी। वहीं, अब राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने भी बीमा कंपनी की अपील को खारिज करते हुए शिकायतकर्ता रिखी राम के हक में फैसला सुनाया है।
यह मामला साल 2017 में रिखी राम बनाम न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जिला सिरमौर निवासी शिकायतकर्ता रिखी राम ने बताया था कि उसने वाहन का बीमा कराया गया था। 5 जून को सड़क धंसने के कारण वाहन पलटकर पहाड़ी से नीचे गिर गया था। हादसे में कार चला रहे उसके बेटे हर्ष शर्मा की मौत हो गई थी। हादसे की सूचना बीमा कंपनी को दी गई, लेकिन कंपनी ने वाहन की क्षति का आकलन करने के बावजूद 7 मार्च 2018 को शिकायतकर्ता के दावे को खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय चालक का लर्निंग लाइसेंस 2 जून को ही समाप्त हो चुका था। दुर्घटना दो दिन बाद यानी 5 जून को घटित हुई थी। साथ ही दुर्घटना के समय चालक के साथ वैध लाइसेंस रखने वाला व्यक्ति भी नहीं था। इससे परेशान होकर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद 6 सितंबर 2023 को आयोग ने फैसले में बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता को नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित 2,46,862 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए थे। साथ ही विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से मुआवजा और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 25 हजार रुपये देने के निर्देश दिए थे।
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राज्य उपभोक्ता आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता के मृतक बेटे ने हादसे से पहले 19 मई 2023 को नियमित लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और उसे उपमंडल अधिकारी ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया था। दुर्घटना के समय तक लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा उसका ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया गया था।
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