पंचायती राज विभाग ने पद भरने को जारी की अजीबोगरीब अधिसूचना
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सरकारी रसोई में जायकेदार तड़का लगाने के लिए खेल में राष्ट्रीय मेडल विजेता का हुनर भी इस्तेमाल होगा। बेमेल सी लगने वाली इस बात को पंचायती राज विभाग ने ‘मसालची’ पदों की भर्ती नियमों में वरीयता का आधार बना दिया है।
सरकार ने मसालची (मसाला कूटने, बर्तन धोने सहित अन्य कार्यों में सहयोग करने वाला) के तीन पद सृजित किए हैं। इन पदों पर भर्ती के नियमों को सरकार ने अधिसूचित कर दिया है।
अजीबोगरीब नियमों में तय हुआ है कि इन तीन पदों पर भर्ती में उन लोगों को वरीयता दी जाएगी, जिन्होंने या तो खेलकूद प्रतियोगिता में राष्ट्रीय मेडल लिया है या फिर एनएसएस का कम से कम एक साल का प्रमाणपत्र या एनसीसी अथवा भारत स्काउट एंड गाइड का प्रमाणपत्र ले रखा है।
मसालची के यह तीन पद मशोबरा, थुनाग और बैजनाथ के पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थानों में पहली बार सृजित किए गए हैं। चतुर्थ श्रेणी के ये पद भरने को लिखित परीक्षा का प्रारूप तय हुआ। इसके लिए किसी बोर्ड से आठवीं की परीक्षा पास करना न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता होगी।
लिखित परीक्षा 85 अंकों की ली जाएगी। इसके बाद मूल्यांकन के 15 अंक रखे गए हैं। यानी पिछड़ी पंचायत, भूमिहीन, घर से सरकारी नौकरी न होने, शारीरिक निशक्तता, कम सालाना आय, विधवा होने आदि के 14 अंक तय किए गए और एक नंबर खेल के राष्ट्रीय मेडल, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एंड गाइड का मिलेगा।
पंचायती राज मंत्री बोले, देखेंगे ये नियम कैसे बना दिए- पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा है कि वह देखेंगे कि इन नियमों को कैसे बना दिया गया है। यही सही है कि पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्रों में मसालची के तीन पद भरे जाने को नियम बनाए जाने थे।
पंचायतों में पांच लाख से ज्यादा की खरीद के लिए होंगे ई- टेंडर
राज्य में पांच लाख रुपये से ज्यादा की खरीद के लिए अब पंचायतों को ई-टेंडर आमंत्रित करने होंगे। अभी तक पंचायतों में निर्माण कार्य के लिए टेंडर आमंत्रित करने के लिए समाचार पत्रों के माध्यम से निविदाएं आमंत्रित होती थीं। राज्य में कुल 3226 पंचायतें हैं।
राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव आरएन बत्ता ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने बजट भाषण में भी पांच लाख रुपये से ऊपर की खरीद के लिए ई टेंडर आमंत्रित कराने की घोषणा की थी।
अब इसको लेकर अधिसूचना जारी होने के बाद से पंचायतों में पांच लाख रुपये से अधिक के निर्माण कार्यों के आवंटन, सेवाएं लेने और सामान खरीदने पर ई टेंडर आमंत्रित करना अनिवार्य कर दिया है। राज्य सरकार कई अन्य विभागों में भी ई-टेंडर आमंत्रित करती है, ताकि निविदाओं को लेकर पारदर्शिता बनी रहे।