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हाईकमान के पास पहुंचा कांग्रेस में 68 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का विवाद

Sat, 03 Aug 2019 01:53 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 03 Aug 2019 01:53 PM IST
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Controversy over appointment of 68 observers in Himachal Congress
- फोटो : अमर उजाला

कांग्रेस के ब्लॉकों में 68 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का विवाद हाईकमान के पास पहुंच गया है। इस गंभीर मामले को लेकर कांग्रेस नेता दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा से सिर्फ छह पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं जबकि जिला शिमला से 15 पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है।

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पार्टी संविधान के तहत बने नियमों को दरकिनार कर पार्टी में बहाल किए नेता भी पर्यवेक्षक लगाए हैं, जबकि इन्हें तीन साल तक कोई भी पद नहीं दिया जा सकता। सवाल यह भी उठाए जा रहे हैं कि इन पर्यवेक्षकों की तैनाती एआईसीसी ही कर सकती है। 
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पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश के ब्लॉकों में तैनात 68 पर्यवेक्षकों की तैनाती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के कई विधायक और पूर्व विधायकों ने इस मामले को लेकर दबी जुबान विरोध करना शुरू कर दिया है। बताते हैं कि यह मामला केंद्रीय नेतृत्व से भी शीघ्र उठाया जाना है। एआईसीसी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल और महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलने का समय मांगा गया है। इसी हफ्ते प्रदेश से कुछ कांग्रेस नेता पार्टी के भीतर के मसलों को लेकर आवाज बुलंद करने वाले हैं। 
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पर्यवेक्षकों की तैनाती को लेकर सबसे गंभीर मामला यही उठाया जा रहा है कि जिन बागी नेताओं को पार्टी से छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखाया गया था, उनको लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में इसी शर्त के साथ लिया गया था कि तीन साल तक कोई पद नहीं दिया जाएगा। ऐेसा नेता भी पर्यवेक्षक लगाए गए हैं।

क्या कहना है प्रदेशाध्यक्ष राठौर का

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर कहते हैं कि पर्यवेक्षकों की तैनाती सिर्फ 15 दिन के लिए की गई है। इन्हें पार्टी का पद नहीं दिया है। जिला शिमला में दूसरे जिलों के लोग भी रहते हैं, इस कारण से शिमला से ज्यादा पर्यवेक्षक बने हैं। अन्य जिलों से भी पर्यवेक्षक बनाए हैं। पर्यवेक्षक बनाना उनका एकाधिकार है।

पर्यवेक्षकों का सौंपा है यह दायित्व
ब्लॉक अध्यक्षों और ब्लॉक कमेटियों की गठन के लिए पर्यवेक्षकों को अपनी भूमिका निभानी है। इन पर्यवेक्षकों की सिफारिश पर ही नए ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनने हैं। 

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