अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की विवादित शुरूआत, भटकने को मजबूर वैज्ञानिक और प्रशिक्षु
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वैश्विक विकास में कृषि, पर्यावरण और व्यवहारिक विज्ञान के योगदान विषय पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की विवादित शुरूआत हुई है। यहां देश भर के कोने-कोने से पहुंचे वैज्ञानिकों और प्रशिक्षुओं को ठिकाना नहीं मिल रहा है। उनके सामने सड़क पर रात गुजारने के हालात पैदा हो गए हैं। इतना ही नहीं कई घंटों का लंबा सफर करके नौणी विवि पहुंचे वैज्ञानिक घंटों तक पंजीकरण के लिए मारामारी करते रहे।
लेकिन उन्हें पंजीकृत नहीं किया गया और बिना पंजीकरण के इन वैज्ञानिकों को भोजन तक नसीब नहीं हुआ। अव्यवस्था से नाराज वैज्ञानिकों और प्रशिक्षुओं ने हंगामा कर दिया और राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के समक्ष ही विरोध भी जताया। राज्यपाल के जाने के बाद भी विवाद नहीं थमा। दरअसल, नौणी विवि में शुरू हुए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए 20 सितंबर तक आवेदन की तारीख रखी गई थी।
सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले सभी आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन करने थे और फीस जमा करवानी थी। संस्था तीन श्रेणियों में दो हजार, ढाई हजार और तीन हजार रुपये फीस का निर्धारण किया था। इसमें वैज्ञानिकों और अन्य हिस्सा लेने वालों के लिए भोजन और रहने का प्रबंध भी किया जाना था। लेकिन शुक्रवार को करीब एक हजार से अधिक आवेदक सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंच गए और भारी भीड़ को देखते हुए संस्था ने पंजीकरण बंद कर दिया।
पांच सौ का किया था प्रबंध : संस्था
जिस समय पंजीकरण बंद किया गया उस समय कई ऐसे आवेदक भी रोक दिए गए जो दूसरे राज्यों से आए थे और उन्होंने ऑनलाइन पंजीकरण करवा रखा था। राजस्थान और उत्तरप्रदेश से आए आवेदकों ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन फीस भरी है। इसके बावजूद यहां पहुंचने पर दोबारा से फार्म भरने को कहा जा रहा है।
सेमिनार की आयोजक एग्रो एनवायर्नमेंटल डेवलपमेंट सोसायटी के संगठन सचिव छत्रपाल सिंह ने बताया कि संस्था ने करीब पांच सौ वैज्ञानिकों और प्रशिक्षुओं के लिए सेमिनार में प्रबंध किया था। संस्था सिर्फ उन्हें ही मान्यता देगी जिन्होंने बीस सितंबर से पूर्व ऑनलाइन पंजीकरण करवाया होगा।