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Kangra: ज्वार, सेम फली, राजमा का सेवन कम करेगा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, कार्यशाला ने वैज्ञानिकों ने किया खुलासा
Thu, 24 Nov 2022 06:47 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, पालमपुर (कांगड़ा)
संवाद न्यूज एजेंसी, पालमपुर (कांगड़ा)
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 24 Nov 2022 06:47 PM IST
सार
सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान पालमपुर में कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिकों ने यह खुलासा किया। इसके अलावा च्वयनप्राश, इम्युनिटी बूस्टर, सन फ्लावर तेल, सिटाके मशरूम, गवार फलियां, आलसी और तिल के बीज चिया सीड, ब्राऊन राइस, काजू, ओटस, अखरोट भी पौष्टिकता से भरपूर हैं।
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ज्वार व राजमा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ज्वार, सेम की फलियां और राजमा में पाए जाने वाले तत्व हृदय रोग को 22 फीसदी तक कम करते हैं। इनका रोजाना सेवन किया जाए ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी काफी कम हो जाता है। सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान पालमपुर में कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिकों ने यह खुलासा किया। इसके अलावा च्वयनप्राश, इम्युनिटी बूस्टर, सन फ्लावर तेल, सिटाके मशरूम, गवार फलियां, आलसी और तिल के बीज चिया सीड, ब्राऊन राइस, काजू, ओटस, अखरोट भी पौष्टिकता से भरपूर हैं।
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स्वस्थ रहने के लिए मनुष्य को इन चीजों का सेवन करना चाहिए। व्यक्ति के शरीर में ईंधन के रूप में काम करने वाले पौष्टिक आहारों को लेकर सीएसआईआर में अब युवा वैज्ञानिक भी शोध कार्य कर रहे हैं। सीएसआईआर में चली इस कार्यशाला में पौष्टिक आहार के महत्व और उसके गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है। कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया है कि पौष्टिक आहारों की गुणवत्ता और शुद्धता सही हो तो शरीर की बीमारियों से बचा जा सकता है।
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सीएसआईआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशि ने इसे लेकर विकसित पारंपरिक ज्ञान-आधारित न्यूट्रास्यूटिकल्स के बारे में बताया। उनका कहना है कि आज पौष्टिक आहारों पर बल देना जरूरी है, जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र पडवाड ने बताया कि स्वास्थ्य स्थितियों के खिलाफ बायोएक्टिव की जांच करने के लिए पशु कोशिका संवर्धन का उपयोग कर इन विट्रो अध्ययनों के महत्व, आवश्यक जैव सुरक्षा स्तरों और ऐसी जांचों के दौरान सावधानियों बरतना जरूरी है।
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सीएसआईआर के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि दुनिया भर में काफी पौष्टिक आहार पाए जाते हैं। इनकी गुणवत्ता को और बढ़ाने और इन पर ओर काम करने के लिए सीएसआईआर में कार्यशाला चल रही है। इसमें देश भर से युवा वैज्ञानिक भी भाग ले रहे हैं, ताकि यह वैज्ञानिक भी पौष्टिक आहार शोध कर सकें।