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Shimla News: पहली बार करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं में असमंजस

Thu, 22 Oct 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2026 11:59 PM IST
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Confusion among women observing Karva Chauth fast for the first time
पंडितों के मुताबिक करवाचौथ पर शुक्र अस्त होने से रहेगा सूतक काल, 29 अक्तूबर को रखा जाएगा व्रत
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शाम 5:38 से 6:56 बजे तक रहेगा पूजा का मुहूर्त
नवविवाहिताएं अपने पंडितों से लें सलाह : भगवती

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सुहाग की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना का पर्व करवाचौथ इस वर्ष 29 अक्तूबर वीरवार को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर महिलाओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

हालांकि इस बार शुक्र अस्त होने और उससे जुड़े सूतक की मान्यताओं को लेकर खासकर नवविवाहिताओं तथा पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बाजारों में भी त्योहार को लेकर रौनक बढ़ने लगी है। शिमला के गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी भगवती प्रसाद ने बताया कि करवाचौथ की चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1:06 बजे शुरू होगी और 29 अक्तूबर की रात 10:09 बजे तक रहेगी। उन्होंने बताया कि करवाचौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 से 6:56 बजे तक रहेगा।
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पुजारी भगवती प्रसाद के अनुसार शुक्र अस्त को लेकर धार्मिक मान्यताओं में अलग-अलग मत प्रचलित हैं। उन्होंने बताया कि शुक्र अस्त 28 अक्तूबर को समाप्त होगा लेकिन इसका सूतक काल 29 अक्तूबर को रहेगा। ऐसे में उनके मतानुसार विशेषकर नवविवाहिताओं और पहली बार करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को इस वर्ष व्रत नहीं रखना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि पहली बार व्रत रखने की शुरुआत अगले वर्ष से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस विषय में निर्णय लेते समय महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपराओं और विश्वसनीय पंचांग का सहारा ले सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं को लेकर अलग-अलग मत होने के कारण व्रत रखने से पहले अपने परिवार के पुरोहित से परामर्श किया जा सकता है।
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ब्रह्म मुहूर्त में सरगी से करें शुरुआत
करवा चौथ के व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में सरगी ग्रहण करने के साथ होगी। इसके बाद महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत का संकल्प लेंगी। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को करवा माता की पूजा-अर्चना करने और व्रत कथा सुनने की परंपरा निभाई जाएगी। रात को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद अर्घ्य दिया जाएगा और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला जाएगा। चंद्रोदय का समय शहर और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, इसलिए महिलाओं को अपने क्षेत्र के अनुसार चंद्रमा निकलने का समय देखना चाहिए।
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