विधायकों पर से हट सकती है डीपीआर की ये शर्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल सरकार विधायक प्राथमिकता योजनाओं से बजट सीलिंग हटा सकती है। सरकार पर कुछ मंत्रियों, विधायकों ने ही इसके लिए दबाव बनाया है। इस सीलिंग के कारण विकास कार्यों के रुकने की बात की गई है। विधायक इसकी वजह से अपने टेन्योर में केवल 50 करोड़ की लागत की ही डीपीआर बना पा रहे हैं।
सड़क और पानी की नई योजनाओं के लिए वे बजट डिमांड नहीं कर पा रहे हैं। अगर कर रहे हैं तो नई डीपीआर योजना विभाग में ही रोकी जा रही हैं। वर्ष 2014 में हिमाचल सरकार ने नाबार्ड से वित्त पोषित एमएलए प्राथमिकता योजनाओं के लिए बजट की एक सीलिंग तय की थी। इसके तहत हिमाचल की 12वीं विधानसभा में चुने गए तमाम विधायक केवल 50 करोड़ रुपये लागत की योजनाओं को ही अपने पूरे टेन्योर में नाबार्ड को वित्त पोषण के लिए भिजवा सकेंगे।
यानी पिछले तीन साल में अगर किसी विधायक की 50 करोड़ रुपये की डीपीआर नाबार्ड को जा चुकी है तो उसके बाद नई डीपीआर नहीं भेजी जा सकेगी। राज्य सरकार के योजना विभाग में बाकायदा इसका परीक्षण हो रहा है। देखा जा रहा है कि कहीं ये योजनाएं 50 करोेड़ बजट की सीलिंग को पार तो नहीं कर रही हैं। अगर ऐसा है तो डीपीआर ही रोकी जा रही हैं।
दो-दो योजनाएं भेज सकते हैं विधायक
नाबार्ड से वित्त पोषण के लिए विधायक सालाना पेयजल, सिंचाई और सड़कों की केवल दो-दो योजनाएं ही रीयली न्यू स्कीम (आरएनएस) में भेज सकते हैं। यानी कुल छह योजनाएं ही भेज सकते हैं। इसी तरह से ऑनगोइंग स्कीम के तहत भी विधायक दो-दो योजनाएं यानी कुल छह स्कीमें भेज सकते हैं। ऐसे में कई बार एक ही योजना 15 से 20 करोड़ रुपये की हो तो वे इनमें से आधी योजनाओं का भी वित्त पोषण नहीं कर पा रहे हैं।
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि 50 करोड़ की डीपीआर मैं पहले ही भेज चुका हूं। 35 करोड़ की डीपीआर लंबित पड़ी हैं। मुख्यमंत्री से 50 करोड़ की इस सीलिंग को बढ़ाने की पहले ही मांग कर चुका हूं। ऐसे में विकास कार्य कैसे होंगे। इस सीलिंग की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए।
'पंचायत चुनाव के बाद लिया जाएगा फैसला'
मुख्य संसदीय सचिव कृषि और जुब्बल-कोटखाई से विधायक रोहित ठाकुर ने कहा कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र में एमएलए प्रायोरिटी योजनाओं के लिए 50 करोड़ रुपये की बजट सीलिंग पार होने वाली है। अब आगे तो डीपीआर ही नाबार्ड को नहीं भेज पाएंगे।
सरकार को इस सीलिंग को हटाना चाहिए। लंबे समय से कई केंद्रीय योजनाओं जैसे पीएमजीएसवाई में सड़कों का बजट नहीं आ रहा। पीने के पानी के लिए एनआरडीडब्ल्यूपी से आने वाले बजट में कटौती की गई है। एआईबीपी में भी बजट नहीं आ रहा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि नाबार्ड से चर्चा के बाद ही वर्ष 2014 में ये तय किया गया था कि विधायक प्राथमिकता योजना की एक विधानसभा क्षेत्र से 50 करोड़ तक की ही डीपीआर भेजी जा सकेंगी। विधायकों की ओर से सीलिंग हटाने की डिमांड पर क्या किया जाना है, इस पर पंचायत चुनाव के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।