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Shimla News: बंदर के काटने पर नहीं मिल सकता मुआवजा

Sat, 05 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 11:59 PM IST
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Compensation cannot be claimed for a monkey bite.
शिमला। राजधानी में बंदरों के हमले में जान गंवाने वाली बुजुर्ग महिला सत्या देवी के परिजनों को मुआवजा मिलेगा या नहीं, इस पर संशय है। वन विभाग का कहना है कि बंदरों को अब वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से बाहर कर दिया है। ऐसे में अब बंदरों के हमले में घायल होने या जान गंवाने पर वन विभाग की ओर से कोई मुआवजे का प्रावधान नहीं है। शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए वन विभाग नगर निगम के साथ मिलकर बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई करेगा। वन विभाग के पास वर्ष 2022 से वर्ष 2025-26 तक वन्य जीवों के हमले के 32 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 6 से 7 मामले लोगों पर हमले करने से घायल होने के थे। इनमें से भी एक मामला बंदर के हमले का था जो 2022 में घटा था, इसके बाद वर्ष 2023 में अधिनियम में संशोधन के बाद बंदर के काटने पर कोई मुआवजा नहीं दिया है। इन सभी मामलों में अब तक 6.41 लाख रुपये का मुआवजा दिया है।
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तुरंत प्रभाव से नहीं दे सकते मुआवजा
वन मंडल अधिकारी शिमला मंडल अनिकेत वान्वे ने बताया कि हमले के मामलों में विभाग तुरंत प्रभाव से कोई मुआवजा नहीं दे सकता। विभाग इसको लेकर भविष्य में कोई प्रावधान करने का प्रयास करेगा। आमजन को हो रहे नुकसान को देखते हुए विशेष मामलों में विभाग कार्रवाई करता है। सूचना मिलने पर नगर निगम के साथ मिलकर लोगों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी। बंदरों को पकड़ने के लिए विभाग के पास बजट का प्रावधान नहीं है ऐसे में निजी मंकी कैचर की मदद से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
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