{"_id":"5991b61d4f1c1be2318b482a","slug":"cm-virbhadra-singh-targets-on-union-health-minister-jp-nadda-over-delay-in-aiims-at-bilaspur","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएम वीरभद्र बोले- एम्स को लटकाने के लिए केंद्र और नड्डा जिम्मेदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएम वीरभद्र बोले- एम्स को लटकाने के लिए केंद्र और नड्डा जिम्मेदार
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर बुशहर
Updated Tue, 15 Aug 2017 09:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि एम्स का शिलान्यास लटकने के पीछे केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जिम्मेदार हैं।
विज्ञापन
प्रदेश में एम्स स्थापित करने को केंद्र राज्य सरकार को कोसता रहा कि सहयोग न मिलने से बिलासपुर में एम्स लटका है, लेकिन केंद्रीय मंत्री के गृहक्षेत्र में भूमि उपलब्ध करवाने के बावजूद वे एम्स निर्माण पर रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बात समझ से परे है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा उनके गृह विधानसभा क्षेत्र बिलासपुर में एम्स का कार्य शुरू करने में रुचि क्यों नहीं दिखा रहे।
विज्ञापन
इसके लिए सरकार अपना पूरा सहयोग देने को तैयार है। एम्स खुलने से राज्य के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। प्रदेश के लोगों को बेहतर उपचार के लिए बाहरी राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
गुणात्मक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता
सीएम ने कहा कि सरकार ने लोगों को गुणात्मक स्वास्थ्य सेवाएं देने को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्य में मरीजों के बेहतर उपचार के लिए अस्पतालों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं।
मुख्यमंत्री सोमवार को रामपुर उपमंडल के तकलेच में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। कहा कि हिमाचल प्रदेश जीवन रक्षक स्वास्थ्य योजना शुरू करने वाला दक्षिण पूर्वी एशिया का पहला राज्य है।
इसमें विशेषकर रूबेला, मीजल और 18 वर्ष की आयु से कम के रोगियों के लिए नि:शुल्क इंसुलिन की सुविधा शामिल हैं। स्वास्थ्य अधोसंरचना सुदृढ़ करने को गत साढ़े चार वर्षों के दौरान 230 स्वास्थ्य संस्थान खोले गए हैं।
सरकार ने चंबा, नाहन और मंडी जिले के नेरचौक स्थित ईएसआईसी तीन मेडिकल कॉलेजों को क्रियाशील बनाया है। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर का मामला वन स्वीकृति के कारण लंबित है।