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पंचायत चुनाव में उलझी सरकार, सीएम ने ली अफसरों की क्लास

Tue, 03 Nov 2015 11:50 PM IST
Updated Tue, 03 Nov 2015 11:50 PM IST
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cm virbhadra singh take meeting on panchayat election.

हाईकोर्ट की ओर से पंचायतों के वार्डों की पुनर्सीमांकन पर रोक लगाने के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अधिकारियों की क्लास ली। बैठक में मंत्री से लेकर अफसर तक को वार्डों का पुनर्सीमांकन के बारे में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया। सीएम के आदेशों के बाद सचिवालय में बैठक का दौर चलता रहा।

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पंचायतीराज और राज्य चुनाव अधिकारी दोपहर तक पंचायत चुनाव का तोड़ ढूंढने में लगे रहे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पंचायत चुनाव मामले में बीच का रास्ता निकालने को कहा है। जनवरी में पंचायत कार्यकारिणी का कार्यकाल पूरा होना है। हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों में अगर पंचायतीराज विभाग ने वार्डों का पुनर्सीमांकन चुनाव तिथि से 120 दिन पहले किया है तो उसे सही माना जाएगा। इसके बाद हुआ पुनर्सीमांकन मान्य नहीं होगा।
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सीएम ने दिए रास्ता निकालने के निर्देश

cm virbhadra singh take meeting on panchayat election.

बैठक में पंचायतीराज विभाग ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को वार्डों की पुनर्सीमांकन की पूरी जानकारी दी। सूत्रों का कहना है कि जिस दिन वार्डों की पुनर्सीमांकन की तिथि निर्धारित की गई। इसके बाद ही वार्डों की सीमाएं निर्धारित करने का काम शुरू किया गया।

इसी बीच नगर निगम और नगर परिषद में कुछेक पंचायतों को शामिल किया गया, जिससे काम प्रभावित हुआ है। प्रदेश सरकार को अभी हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखना है। इसके चलते मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बीच का रास्ता निकालने के निर्देश दिए।

आपसी तालमेल की कमी से बढ़ा पुनर्सीमांकन विवाद

cm virbhadra singh take meeting on panchayat election.

पंचायतीराज और शहरी विकास विभाग में आपसी तालमेल न होने के कारण वार्डों का पुनर्सीमांकन विवाद बढ़ा है। शहरी विकास विभाग ने एक्ट के मुताबिक 7 पंचायतों को नगर निगम धर्मशाला में शामिल कर दिया, लेकिन इसकी सूचना पंचायतीराज विभाग को तब दी गई, जब इन पंचायतों को धर्मशाला नगर निगम में मिला दिया था।

पंचायतीराज विभाग शहरी विकास विभाग की सूचना का इंतजार करता रहा। विभाग के सुस्त रवैये से वार्ड की सीमाएं निर्धारित समय पर नहीं हो पाईं। इससे विवाद खड़ा हो गया। शहरी विकास विभाग ने 17 पंचायतों को नगर निकाय और नगर निगम में शामिल किया है। इनमें धर्मशाला नगर निगम में 7 पंचायतें शामिल हैं, जबकि अन्य निकायों में शामिल की गईं।

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धर्मशाला नगर निगम पर भी असमंजस

cm virbhadra singh take meeting on panchayat election.

धर्मशाला को नगर निगम का दर्जा दिया गया, लेकिन शहर की आबादी कम थी, इसके चलते शहरी विकास विभाग ने 7 पंचायतों की करीब 20 हजार आबादी को नगर निगम में शामिल कर दिया। पंचायतीराज विभाग का मानना है कि जिस वक्त इन पंचायतों को मिलाने की प्रक्रिया चल रही थी, अगर उस वक्त ये सूचना मिलती तो पंचायतीराज विभाग ने उसी समय इन पंचायतों को अपने यहां से काट देना था।

लेकिन सूचना समय पर न मिलने से वार्ड पुनर्सीमांकन में देरी हो गई। इधर, शहरी विकास विभाग की मानें तो पंचायतों का नगर निगम धर्मशाला और नगर परिषद में मिलने की समय-समय पर अधिसूचनाएं जारी होती रहीं। पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों को भी इस बारे में सूचित किया गया। शहरी विकास विभाग अपने एक्ट के मुताबिक पंचायतों को नगर निगम में मिलने का अधिकार रखता है।

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