नए जिलों के गठन को लेकर वीरभद्र सिंह का बड़ा बयान
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि प्रदेश में नए जिलों के सृजन का कोई भी औचित्य नहीं है। और न ही वह कांग्रेस पार्टी के प्रस्तावित संगठनात्मक जिलों के गठन के पक्ष में हैं।
क्योंकि, संगठनात्मक जिलों की तर्ज पर भविष्य में प्रशासनिक जिलों के सृजन की मांग उठ सकती है। मंगलवार को शिमला रवाना होने से पूर्व नूरपुर स्थित लोनिवि के रेस्ट हाउस में पत्रकारों को संबोधित किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दो टूक शब्दों में प्रदेश में जिलों के पुर्नगठन की आवश्कयता को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिलों के गठन का मुद्दा कुछ नेताओं के अहम से जुड़ा हो सकता है, लेकिन नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन से विकास पर कोई असर नहीं पड़ता।
उन्होंने शिमला में भाजपा कार्यालय पर कथित हमले में युकां अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह को क्लीन चिट देने के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बयान पर चुटकी देते हुए कहा कि उनके बेटे से धूमल को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की सूचना फोन पर देने की गलती हो गई।
अवैध खनन के खिलाफ है सरकार
अगले दिन भाजपा कार्यालय से युकां कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया। बावजूद इसके प्रदेश सरकार ने इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए। लेकिन, भाजपा ने उसका भी बॉयकाट कर दिया।
सीएम ने भाजपा के प्रदेश में आर्थिक कुप्रबंधन के आरोपों को नकारते हुए कहा कि कांग्रेस शासित प्रदेश में बेहतर आर्थिक प्रबंधन है। भाजपा का यह आरोप सरासर गलत है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि वह हमेशा से ही खनन माफिया के खिलाफ रहे हैं।
कायदे-कानून को ताक पर रखकर प्रदेश की नदियों में होने वाले अवैध खनन के सख्त खिलाफ हैं। बेशक सूबे में निर्माण सामग्री की आवश्यकता पूरी करने के लिए खनन भी जरूरी है।
इसके लिए उनकी सरकार सिर्फ वैज्ञानिक व व्यवस्थित खनन की ही इजाजत देगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में अब पर्याप्त सरकारी स्कूलों का विस्तार हो चुका है।
भविष्य में सिर्फ आवश्यकतानुसार ही नए स्कूल खोलें जाएंगे। अब प्रदेश सरकार की प्राथमिकता मौजूदा शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने तथा शिक्षा में गुणवता सुनिश्चित करने की होगी। इस मौके पर उनके साथ नूरपुर हलके के विधायक अजय महाजन भी मौजूद रहे।