छापेमारी में जब्त दस्तावेज ईडी के पास रखने के फैसले को वीरभद्र ने दी चुनौती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आय से अधिक संपत्ति मामले में निर्णायक प्राधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास ही दस्तावेज रहने का आदेश दिया गया है।
ये दस्तावेज ईडी ने उनके घर से छापेमारी में जब्त किए थे। न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने 16 मई 2016 के इस आदेश को चुनौती देने संबंधी मुख्यमंत्री की संशोधित अर्जी को सुनने के लिए स्वीकार कर लिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।
अदालत ने ईडी के उस तर्क को भी गंभीरता से लिया जिसमें इस अर्जी व मुख्य याचिका की सुनवाई पर सवाल उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री की अर्जी में कहा गया है कि मामले में उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
बिना पक्ष रखे ही आदेश जारी करने की दलील
पक्ष रखने की अनुमति दिए बगैर निर्णायक प्राधिकरण ने अपना आदेश जारी कर दिया। गौरतलब है कि मुख्य याचिका में मुख्यमंत्री ने अपने घर में ईडी द्वारा छापेमारी व दस्तावेज जब्त करने का विरोध जताते हुए अपने खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) में चल रहे मामले को रद्द करने की अपील की है।
पेश याचिका में मुख्यमंत्री ने निर्णायक प्राधिकरण के अप्रैल व मई के उन आदेश को भी चुनौती दी है, जिसमें छापेमारी व दस्तावेज जब्त के खिलाफ दायर उनकी अर्जी को रद्द कर दिया गया था और जांच के बाद छापेमारी के कारणों पर विश्वास करने की बात कही गई थी।
उल्लेखनीय है कि 8 जुलाई को हाईकोर्ट ने ईडी को जब्त दस्तावेज सील बंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि ईडी कोई सुपर इंवेस्टिगेटर नहीं है जो छापेमारी से संबंधित सुबूत किसी के साथ साझा नहीं कर सकती है।