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सीएम के बयान से बेहद दुखी हैं 'सुखराम' जानिए क्यों

Thu, 07 May 2015 10:16 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 07 May 2015 10:16 AM IST
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CM's statements are unhappy 'sukhram ram' Know why.

मंडी में कांग्रेस की लोकसभा सीट भाजपा की ओर से चलाए गए ब्राह्मणवाद के कारण हारने को लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बयान के बाद पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुखराम ने कहा कि उन्हें इससे बड़ा दुख हुआ है।

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह उनसे उम्र में आठ साल छोटे हैं। वीरभद्र राजनीति के विशेषज्ञ हैं। वह दूरदर्शी हैं, पर भावुक भी हैं।

उन्हें लगता है कि कुछ स्वार्थी लोगों ने उनकी भावुकता का फायदा उठाते हुए उन्हें भ्रमित किया है, जिससे उन्होंने इस प्रकार की बात की है। पंडित सुखराम ने बुधवार को शिमला के आशियाना में पत्रकारों से बात की।
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इस अवसर पर पंडित सुखराम ने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से उन्हें मालूम हुआ कि उन पर जातिवाद का इल्जाम लगाया गया है। इससे उन्हें बड़ा दुख हुआ है। वह इस बारे में कुछ स्पष्ट करना चाहते हैं।
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उन्होंने खुद मंडी में लोकसभा और विधानसभा के 13 चुनाव लड़े, मगर कभी भी जातिवाद का सहारा नहीं लिया। हर वर्ग का ध्यान रखा।

रामस्वरूप को तब देखा, जब चुनाव हो चुके थे

CM's statements are unhappy 'sukhram ram' Know why.

पंडित सुखराम ने कहा कि सांसद चुने गए रामस्वरूप शर्मा को उन्होंने अपने घर पर तब देखा, जब चुनाव हो चुके थे और रिजल्ट निकला नहीं था। उनको इतना बताया कि उनकी पार्टी ने उनको टिकट देने में देरी कर दी।

रामपुर से लीड दिलाने के लिए सीएम का आभार जताया बेटे नहीं, ठाकुर को बनाया उत्तराधिकारी वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि उन्होंने हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ एसएलपी फाइल कर दी थी।

उन्हें लगा कि चुनाव में बहुत सी बातें हो जाती हैं। वह नहीं चाहते थे कि उनका केस प्रेजुडिस हो जाए। सुखराम ने कहा कि जब उन्हें पार्लियामेंट जाने को कहा गया तो उनके एसेंबली सीट पर दो उत्तराधिकारी थे। ये उनका बेटा अनिल शर्मा और डीडी ठाकुर थे।

उन्होंने ऐसे में अपने बेटे को नहीं, बल्कि एक राजपूत डीडी ठाकुर को उत्तराधिकारी बनाया। बाद में डीडी ठाकुर भारी मतों से जीते। जब पार्लियामेंट का चुनाव 1984 या 1985 में लड़ा तो सबसे ज्यादा वोट उन्हें रामपुर में मिले। इसके लिए वह वीरभद्र सिंह के आभारी हैं।

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